दोनों मित्र, अमृतराय और दाननाथ, आश्रम की सैर पर निकले। अमृतराय ने असी-संगम के किनारे पचास एकड़ जमीन ली है और वहाँ एक छोटा मकान बनवाया है। आश्रम में एक दफ्तर और शो-रूम है जहां कई महिलाएँ और बच्चे काम कर रहे हैं। शो-रूम में विभिन्न हस्तशिल्प और खाद्य सामान बिक रहे हैं। दाननाथ ने अमृतराय से पूछा कि इतनी सक्षम महिलाएँ कहाँ से मिलीं। बगीचे में फूलों के पौधे और एक हौज है, जहाँ कुछ लड़कियाँ पानी डाल रही हैं। पूर्णा, एक लड़की, वहाँ फूलों का गुलदस्ता बना रही है। अमृतराय ने पूर्णा से पूछा कि उसकी तबीयत कैसी है और उसे मंदिर देखने के लिए चलने का कहा। अमृतराय ने कहा कि उन्हें यहाँ एक मंदिर बनवाने की जरूरत महसूस हो रही है। उन्होंने पूर्णा की बदौलत भक्ति की एक झलक पाई और कृष्ण भगवान की पूजा का समय पूछा। दाननाथ ने आश्वासन दिया कि प्रेमा अगले दिन आएगी। जब दोनों मित्र वहाँ से चले, दाननाथ ने देखा कि समय तेजी से बीत गया है। घर लौटने पर, अमृतराय ने रसोइए को डांटा कि उसने भोजन तैयार होने की सूचना क्यों दी, क्योंकि वह पहले ही मना कर चुके थे। प्रतिज्ञा अध्याय 17 Munshi Premchand द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 42.1k 7.2k Downloads 36.7k Views Writen by Munshi Premchand Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण प्रतिज्ञा उपन्यास विषम परिस्थितियों में घुट घुट कर जी रही भारतीय नारी की विवशताओं और नियति का सजीव चित्रण है। प्रतिज्ञा का नायक विधुर अमृतराय किसी विधवा से शादी करना चाहता है ताकि किसी नवयौवना का जीवन नष्ट न हो। ..। नायिका पूर्णा आश्रयहीन विधवा है। समाज के भूखे भेड़िये उसके संचय को तोड़ना चाहते हैं। उपन्यास में प्रेमचंद ने विधवा समस्या को नए रूप में प्रस्तुत किया है एवं विकल्प भी सुझाया है। दाननाद अपने मित्र को प्रतिज्ञा की याद दिलाते हैं तब अमृतराय वनिता भवन की ओर दिखाकर सूचना देते है कि अब उसका निर्वाह करने में ही प्रतिज्ञा पूरी होगी। दाननाद जानते है कि अब अमृतराय आजीवन अविवाहित रहकर समाज सेवा करेगें। इस उपन्यास में प्रेमचन्द ने नन्कलीन भारतीय समाज में व्याप्त विध्वा-समस्या का चित्रण किया। पूर्णा पात्र के द्वारा समाज में तिरस्कृत और पीड़ित विधवाओं की मजबूरियों का मरमस्पर्शी चित्रण किया गया। सुमित्रा और प्रेमा के पात्र आदर्श नारी - पात्र हैं तो कमलाप्रसाद अबलाओं पर अत्याचार करनेवाले दुष्टों का प्रतिनिधि है। प्रेमचन्द ने विध्वा-समस्या का समाधान अर्थिक स्ववलम्बन में दिखाया, जो आचरणात्मक है। प्रेमचन्द ने अपने जीवन में स्व्यं एक बाल - विधवा से विवाह करके समाग के सामने आदर्श प्रस्तुत किया। प्रस्तुत उपन्यास की भाषा सरल और व्यावहारिक है। कहावतों और मुहावरों के प्रयोग से उपन्यास सजीव बन पड़ा। हर दृष्टि से यह उपन्यास प्रेमचन्द की उत्तम कृतियों में से एक है। Novels प्रतिज्ञा प्रतिज्ञा उपन्यास विषम परिस्थितियों में घुट घुट कर जी रही भारतीय नारी की विवशताओं और नियति का सजीव चित्रण है। प्रतिज्ञा का नायक विधुर अमृतराय किसी वि... More Likes This BEYOND THE MISSION Mishaal Vanya - 2 द्वारा insha कुत्रिम बुद्धिमता - 1 द्वारा Ramesh Desai The Legend Of Divyanshi - 1 द्वारा साहिल कैंथला अनकहा सच ( भाग - 1) द्वारा Vishakha Pareek कुदरत का कानून..- 2 द्वारा shilpi वो रात जब सब बदल गया - 1 द्वारा Ishaaa LAST STAGE - 1 द्वारा Muhib Khan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी