"बुलबुला" कहानी में एक व्यक्ति है जो थियेटर में "मेरा नाम जोकर" फिल्म देखने गया था, लेकिन इंटरवल में फिल्म छोड़कर बाहर निकल आया। वह एक नुकीले पत्थर पर बैठकर अपने विचारों में खोया हुआ है। उसके चारों ओर समुद्र की हल्की लहरें बुलबुले बनाती हैं, जो पत्थरों के बीच बिखरे हुए हैं। वह अपने बचपन की यादों में खो जाता है, जब उसने पानी में बुलबुले बनाए थे। अब वह छोटी सी तीली से बुलबुले को फोड़ने की कोशिश करता है, लेकिन उसे यह सब खेल जैसा नहीं लगता। उसकी आंखों में कोई भावना नहीं है, जैसे वह अपने अस्तित्व की खोज में है। कहानी में एक मकोड़ा भी है जो बुलबुलों की ओर आकर्षित होता है और उन्हें देखने के लिए आता है। मकोड़े का व्यवहार बुलबुलों के प्रति उसकी जिज्ञासा को दर्शाता है। कहानी में व्यक्ति के जीवन की वास्तविकता, उसकी नौकरी पाने की कठिनाइयों और उसके प्यार मीनाक्षी के साथ संबंधों की झलक भी मिलती है। यह कहानी जीवन की जटिलताओं और छोटे-छोटे क्षणों की मासूमियत को दर्शाती है। बुलबुला Ajay Oza द्वारा हिंदी लघुकथा 4.7k 2.1k Downloads 7k Views Writen by Ajay Oza Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Hindi Short Story More Likes This मुक्त - भाग 14 द्वारा Neeraj Sharma पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1 द्वारा Anil Kundal Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther सजा.....बिना कसूर की - 1 द्वारा Soni shakya प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी