इस कहानी में जया नाम की एक बच्ची को उसकी माँ द्वारा पीटे जाने का दृश्य है। जया के रोने की आवाज सुनकर दादाजी उठते हैं, लेकिन वे सक्रिय रूप से हस्तक्षेप नहीं करते, बल्कि अपनी नाराजगी खाँसने के माध्यम से व्यक्त करते हैं। दादाजी को इस प्रकार की घटनाएँ पसंद नहीं हैं, लेकिन वे चुप रहते हैं क्योंकि उनके विचार अब पुरानी मान्यताओं के अनुसार हैं, जो वर्तमान समय में अप्रचलित माने जाते हैं। जया के अभिभावकों की उम्मीदें हैं कि वह उच्च शिक्षा प्राप्त करे और आधुनिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बने। वे जया से चाहते हैं कि वह पारंपरिक और पुराने विचारों में न बहे, बल्कि वर्तमान परिवेश के अनुसार अपने जीवन को सफल बनाये। कहानी इस बात को दर्शाती है कि कैसे पुरानी पीढ़ी की सोच और मान्यताएँ नए समय के साथ बदलती हैं, और कैसे वे अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए सीमित साधनों का उपयोग करते हैं। कहानी में युग परिवर्तन, शिक्षा, और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच का संघर्ष प्रमुख विषय हैं, जो एक व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत किये गए हैं। सेवकाई वनाम् आकांक्षा Pradeep Kumar sah द्वारा हिंदी लघुकथा 1.3k 2.1k Downloads 6.7k Views Writen by Pradeep Kumar sah Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण दो रचना More Likes This उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3 द्वारा Soni shakya शनिवार की शपथ द्वारा Dhaval Chauhan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी