इस कहानी में एकलव्य और उसके गुरु द्रोणाचार्य के बीच एक फोन कॉल का संवाद है। एकलव्य अपने गुरु से बात करना चाहता है, लेकिन गुरु पहले बात करने से मना कर देते हैं। एकलव्य आरोप लगाता है कि गुरु द्रोणाचार्य ने उसे जानबूझकर नजरअंदाज किया और अर्जुन को विशेष लाभ दिया। वह बताता है कि गुरु ने अर्जुन को जानबूझकर अंतिम स्थान पर रखा ताकि वह सवाल का सही जवाब दे सके, जबकि अन्य सभी ने गलत उत्तर दिए। एकलव्य यह भी कहता है कि अर्जुन ने सही उत्तर नहीं दिया, बल्कि गुस्से में आकर एक अपशब्द का उपयोग किया, जिसे गुरु ने पकड़कर उसे उत्तीर्ण घोषित कर दिया। इस प्रकार, एकलव्य अपने गुरु की भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति और अनैतिकता की ओर इशारा करता है। कहानी अंत में एकलव्य के तर्कों के माध्यम से गुरु की गलतियों को उजागर करती है। धनुर्विद्या डोट कोम Mukul Jani द्वारा हिंदी हास्य कथाएं 9.3k 3k Downloads 12.7k Views Writen by Mukul Jani Category हास्य कथाएं पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण पौराणीक पात्रों गुरु द्रोण एवं एकलव्य के बीच अगर मोबाइल फोन पे आज के जमानेमें बातचीत हो तो वो कैसी हो शकती है गुरूपूर्णीमा के दिन लिखा गया ये सॅटायर आपको एक अलग ही दुनियामें ले जायेगा! More Likes This नामुमकिन इश्क - एपिसोड 47 द्वारा kajal jha थ्योरी ऑफ वन शू: रात, रिस्क और स्प्लेंडर - 1 द्वारा Shivam Dhuriya गुप्त ख़ज़ाना द्वारा Shivam Dhuriya तीन तिगाड़ा, असाइनमेंट बिगाड़ा! द्वारा Shivam Dhuriya साहित्य का सर्कस - 1 द्वारा rakshita pal रांड का संड - भाग 1 द्वारा Renu Chaurasiya Conversations With Myself - 4 द्वारा Aarushi Singh Rajput अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी