कहानी में वसुधा को एक पत्र मिलता है जिसमें उसकी बेटी सोमया अपनी माँ से प्यार जताते हुए कहती है कि वह कभी भी माँ का प्यार नहीं पा सकी। पत्र पढ़ते वक्त वसुधा की आँखों में आँसू आ जाते हैं और वह अपने अतीत में चली जाती है जब उसने सोमया को जन्म दिया था। वसुधा और उसके पति अजीत को पता चलता है कि वसुधा फिर से माँ नहीं बन सकेगी, जिससे वसुधा बहुत दुखी और आहत हो जाती है। वह सोमया को दोष देने लगती है और उसे अपने जीवन का पूरा महसूस नहीं होता। अजीत वसुधा की इस प्रतिक्रिया से दुखी होते हैं और समझाते हैं कि सोमया ही उनका संसार है। लेकिन वसुधा अपने बेटे की चाहत के कारण सोमया को दूर कर देती है। कहानी माँ-बेटी के रिश्ते और मातृत्व की जटिलताओं को दर्शाती है। ईश्वर Ambalika Sharma द्वारा हिंदी लघुकथा 37.8k 2.6k Downloads 8.7k Views Writen by Ambalika Sharma Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण जीवन मैं माँ का महत्त्व कितना होता है इश्वर से भी ऊँचा होता है माँ का स्थान यह बात को बखूबी समजा रही कहानी पढ़िए इश्वर More Likes This लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 1 द्वारा Std Maurya दिल्ली जिमखाना क्लब द्वारा Devendra Kumar Fake Boyfriend real Feelings - 1 द्वारा Mawaskar Pratigya कॉल - 1 द्वारा sky कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 द्वारा miss k पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma कोन्निचिवा: माय देसी लव - 1 द्वारा Kajal Soam अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी