कहानी "आदर्श और मजबूरी" प्रदीप कुमार साह द्वारा लिखी गई है। यह एक नौकरीपेशा व्यक्ति और उसके मित्र के बीच की बातचीत पर आधारित है। मित्र ने लेखक को एक खुशी के मौके पर आमंत्रित किया, जिसके बाद लेखक शहर गया और वापस अपने गाँव लौट रहा था। लेखक ने बस पकड़ने के लिए बस पड़ाव पर पहुँचकर चाय पीने का निर्णय लिया। वहाँ एक 12-14 साल का लड़का था, जो स्कूल का छात्र था और उसके गले में एक तख्ती थी, जिस पर लिखा था कि "यह पागल है, इसके बातों का ध्यान मत दो।" दुकानदार और अन्य लोग उसकी कहानी सुनकर दुखी होते हैं। चायवाले ने बताया कि लड़के ने एक दिन बस पड़ाव पर एक छोटे वाहन चालक की पिटाई होते देखी और उसने बीच-बचाव करने की कोशिश की। उस समय कोई और उस पर हस्तक्षेप करने का साहस नहीं कर रहा था। यह कहानी सत्य और अहिंसा की बात करती है, और यह दिखाती है कि समाज में आदर्शों और मजबूरियों के बीच संघर्ष कैसा होता है। Adarsh Aur Majburiya Pradeep Kumar sah द्वारा हिंदी लघुकथा 1.2k 2.1k Downloads 8.6k Views Writen by Pradeep Kumar sah Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण कहानी. प्राणिमात्र का यह स्वभाव है की वह सुख चाहते हैं और खतरे से यथासम्भव बचना भी चाहते हैं. किंतु संसार में बिना जोखिम उठाये कोई काम नहीं होते.यह सभी जानते हैं, फिर उनकी यह कोशिश होती है कि कम खतरा उठाकर अधिक प्रतिफल प्राप्त किये जाय. अथवा कम प्रतिफल देनेवाले जोखिम बाद में उठाया जाये.वह टालने की प्रवृति एक सीमा में उचित है.किंतु कुछ जोखिम वैसे भी होते जिसे उठाना अनिवार्य होते हैं किंतु वह भविष्य में प्रतिफल देतें हैं.उसके प्रतिफल बहुआयामी और सदैव शुभता देने वाले होते हैं. चूँकि वह भविष्य में प्रतिफल देने वाले होते हैं इसलिए उसे बारम्बार टालने की कोशिश होती है. फिर टालने की उस कोशिश को मजबूरी का नाम देकर स्वयं (मन को)और दूसरे को समझाने के प्रयत्न किये जाते हैं.वास्तव में वह बारम्बार टालने की प्रवृति ही वास्तविक मजबूरी है.एक कहावत है कि यदि एक झूठ सौ बार दुहराये जाये तो वह सत्य सा प्रतीत होता है. इसी तरह बारम्बार मजबूरी शब्द दुहराते रहने से उत्तरोत्तर मन और हमारा कार्य क्षमता प्रभावित होता है और हमारा आत्म शक्ति भी दुर्बल हो जाते हैं. More Likes This अलविदा आनंद! द्वारा Devendra Kumar आग और ठहराव - 1 द्वारा Alka rahul Aggarwal क्या सब ठीक है - 5 द्वारा Narayan Menariya बारह बरश का इंतज़ार - 1 द्वारा kusum kumari कालू की पहाड़ी - 1 द्वारा RAAHULL SHARMA खामोश बेटी - 1 द्वारा blue sky and purple ocean मुक्त - भाग 14 द्वारा Neeraj Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी