कहानी "रामकीरत की रीढ़" में रामकीरत एक क्षेत्रीय अखबार में काम करता है, जहां उसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। रात 9 बजे के बाद सामान्य खबरें स्वीकार नहीं की जातीं, और सभी कर्मचारी तेजी से काम में जुटे रहते हैं। रामकीरत, जो अपने आप को अन्य कर्मचारियों से भिन्न महसूस करता है, अपनी शारीरिक और मानसिक स्थिति के कारण असहज है। वह अपने सहकर्मियों की तुलना में कमजोर और लुंजपुंज है, और उसे लगता है कि उसकी रीढ़ ही उसकी प्रगति में बाधा डाल रही है। वह सोचता है कि जीवों में अनुकूलनशीलता होती है, और उसी के चलते उसके सहकर्मी क्रकच जैसे मजबूत बन गए हैं, जबकि वह अभी भी अपनी पुरानी स्थिति में है। रामकीरत की दुविधा यह है कि वह अपनी रीढ़ को दफ्तर में छोड़कर आता है, लेकिन कभी-कभी उसे उसे अपने साथ लाने की जरूरत महसूस होती है। वह अपने भविष्य को लेकर चिंतित है, यह सोचते हुए कि सूचना युग के लिए क्रकच जैसी क्षमताएं आवश्यक हैं। अंततः, वह अपनी आदतों और रीढ़ से जुदा होने के संघर्ष में खुद को अकेला और असहाय महसूस करता है। रामकीरत की रीढ Pramod Ranjan द्वारा हिंदी लघुकथा 3.1k 2.2k Downloads 9.1k Views Writen by Pramod Ranjan Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण एक मीडिया संस्थान में काम करने वाले रामकीरत की कहानी, जिसे एक दिन अचानक महसूस होता है कि उसकी रीढ गायब हो गयी है। More Likes This पहली मुलाक़ात - 1 द्वारा puja नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी