व्यंग्यरचना-1 पत्नीजी के नखरे book and story is written by Virendra Devangan in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. व्यंग्यरचना-1 पत्नीजी के नखरे is also popular in Comedy stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. पत्नीजी के नखरे Virendra Dewangan द्वारा हिंदी हास्य कथाएं 819 1.5k Downloads 4.6k Views Writen by Virendra Dewangan Category हास्य कथाएं पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण कर्माजी की पत्नीश्री उसको ठिठुरती ठंड में झिंझोड़कर उठाई और खुद रजाई में दुबकते हुए नाराजगी जताई, ‘‘उठो भी; कब तक खर्राटे भरते रहोगे? इतना सोने के बावजूद तुम्हारी नींद कभी पूरी नहीं होती। दिनभर कौन-सा पहाड़ खोदते रहते हो, जो थककर चूर हो जाते हो। आफिस में फखत कुर्सी तो तोड़ते हो।’’ More Likes This पिंकू की परी - 1 द्वारा Deepak Kumar Tiwari वेरियन के आसमान का खूंखार ताज - 4 द्वारा sukhvinder Singh Rai प्यार भी तुमसे और टकरार भी - 1 द्वारा July Writes Mr. Ms. Fake - एपिसोड 1 द्वारा kajal jha फ़ेक फ़िऑन्से चैलेंज - 1 द्वारा priyanka katiyar Rebirth of a Bench - Index द्वारा Amardeep Kumar God Wishar - 3 द्वारा Ram Make अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी