parchhai book and story is written by राजनारायण बोहरे in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. parchhai is also popular in Short Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. परछाईं राजनारायण बोहरे द्वारा हिंदी लघुकथा 441 768 Downloads 4.7k Views Writen by राजनारायण बोहरे Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण परछाइयाँअसीर उस दिन चौके के कोने में बैठा थाली को ऐसे घूर रहा था जैसे उसमें रोटी नहीं, कोई सवाल रखा हो—जिसका जवाब उसके पास नहीं है। दाल की सतह पर जमी पतली-सी परत बार-बार काँप जाती, जैसे उसकी अपनी बेचैनी थाली में उतर आई हो।“खा क्यों नहीं रहे हो?” अब्बू ने सिलाई मशीन से नजर उठाए बिना पूछा। उनके पैर मशीन के पेडल पर वैसे ही चलते रहे—एक लय में, जैसे जिंदगी का पहिया, जो चाहे कुछ भी हो, रुकता नहीं।असीर ने कौर तोड़ने की कोशिश की, मगर हाथ वहीं ठिठक गया। “भूख नहीं है,” उसने धीमे से कहा।असल More Likes This क्या सब ठीक है - 5 द्वारा Narayan Menariya बारह बरश का इंतज़ार - 1 द्वारा kusum kumari कालू की पहाड़ी - 1 द्वारा RAAHULL SHARMA खामोश बेटी - 1 द्वारा blue sky and purple ocean मुक्त - भाग 14 द्वारा Neeraj Sharma पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1 द्वारा Anil Kundal Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी