Aise Budhe Bail ko kun bandh bhus det book and story is written by Devendra Kumar in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Aise Budhe Bail ko kun bandh bhus det is also popular in Short Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस देत Devendra Kumar द्वारा हिंदी लघुकथा 370 796 Downloads 3.5k Views Writen by Devendra Kumar Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस दे उपरोक्त देशी कहावत मैंने दो अवसरों पर सुनी थी, दोनों अलग सन्दर्भ थे अलग अलग तरह लोगों के मुंह से इसे सुना था. पहली बार तो कहावत बूढ़े गौ पुत्र वृषभ के लिये ही बचपन में सुनी थी, जिसे दया का बिजार कहते थे. दूसरी बार बड़ा होने पर अपने सबसे चहेते कन्हैया चाचा के बारे में जो बचपन से ही मेरे हीरो रहे थे. पहली बार कुछ कहावत सामान्य लगी थी पर दूसरी बार सुन कर बहुत क्षोभ हुआ था. जब भी कहीं भी इस कहावत को देर सबेर सुनता हूँ. More Likes This तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अलविदा आनंद! द्वारा Devendra Kumar आग और ठहराव - 1 द्वारा Alka rahul Aggarwal क्या सब ठीक है - 5 द्वारा Narayan Menariya बारह बरश का इंतज़ार - 1 द्वारा kusum kumari कालू की पहाड़ी - 1 द्वारा RAAHULL SHARMA अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी