Between Decency and Solitude book and story is written by Rishabh Sharma in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Between Decency and Solitude is also popular in Short Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. तमीज़ और तन्हाई के दरमियान Rishabh Sharma द्वारा हिंदी लघुकथा 1k Downloads 2.8k Views Writen by Rishabh Sharma Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण तमीज़ और तन्हाई के दरमियान "हुज़ूर, मोहब्बत में लहज़ा भी वही रखिए, जो चाय में इलायची की तरह बस एहसास छोड़ जाए।" लखनऊ की शामें कुछ यूँ होती हैं जैसे किसी शायर की अधूरी ग़ज़ल — न खत्म होती हैं, न ही पूरी। चौक के पुराने मुहल्ले में एक कोठी थी ‘रौशन मंज़िल’ — नाम जितना रोशन, किस्मत उतनी ही धुँधली। वहीं रहती थी रौशनआरा बेग़म — उम्र कोई उन्नीस या बीस, मगर अदब ऐसा कि कोई भी तहज़ीब शरमा जाए। चाय की दुकान पर बैठा रेहान अकसर कोठी की बालकनी को देखता, जैसे वहाँ से निकलता हर परिंदा More Likes This एक डिवोर्स ऐसा भी - 1 द्वारा Alka Aggarwal पहली मुलाक़ात - 1 द्वारा puja नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी