Param Bhagwat Prahlad ji - 5 book and story is written by Praveen Kumrawat in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Param Bhagwat Prahlad ji - 5 is also popular in Spiritual Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story.
परम भागवत प्रह्लादजी -भाग5 - भ्रातृ वध
Praveen Kumrawat
द्वारा
हिंदी आध्यात्मिक कथा
Five Stars
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विवरण
जिस समय सारे जगत् में तीनों लोक और चौदहों भुवन में देवताओं की तूती बोल रही थी, देवराज इन्द्र का आधिपत्य व्याप्त था और असुरों का आश्रयदाता कोई नहीं था उसी समय भगवान् की माया की प्रेरणा से देवराज इन्द्र को अभिमान हुआ और उनका विवेक और उनकी बुद्धि अभिमान के वशीभूत होकर अविवेकिनी बन बैठी। जिस हृदय में अभिमान का आवेश हो जाता है, उस हृदय में शील टिक नहीं सकता और जिस हृदय में शील नहीं होता, उसको सत्य, धर्म, लक्ष्मी आदि सद्गुण-पूर्ण समस्त ऐश्वर्य परित्याग कर देते हैं। इसी कारण से अभिमानी देवराज इन्द्र को राज-लक्ष्मी उनके
भारतवर्ष के ही नहीं, सारे संसार के इतिहास में सबसे अधिक प्रसिद्ध एवं सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण वंश यदि कोई माना जा सकता है, तो वह हमारे चरित्रनायक परमभाग...
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