यह कहानी गोविन्द सेन की है, जिसमें वह अपने पुराने दोस्त संजय से दस साल बाद अचानक मिलता है। इस मुलाकात के दौरान, गोविन्द को संजय में कई बाहरी और आंतरिक बदलाव दिखाई देते हैं। गोविन्द संजय को अपने बचपन के दिनों से जानता है, जब वह आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा था, फिर भी पढ़ाई में अव्वल रहा। संजय की मां ने उन्हें चाय परोसी थी, जो कि उनके पारिवारिक परंपरा का हिस्सा था। दोनों की दोस्ती शिक्षक प्रशिक्षण के दौरान और भी गहरी हुई। गोविन्द और संजय के अलावा, चम्पालाल नाम का एक और साथी भी है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उनकी दोस्ती को मजबूत बनाता है। कहानी में दोस्ती, समय के साथ बदलाव, और सामाजिक परंपराओं का उल्लेख है। वही दूरियाँ Govind Sen द्वारा हिंदी प्रेम कथाएँ 8.5k 1.9k Downloads 6.7k Views Writen by Govind Sen Category प्रेम कथाएँ पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण अचानक संजय से मिलना हुआ। लगभग दस साल बाद। आँखें मिली। पहचान की चमक कौंधी। यंत्रवत् हाथ आगे बढ़ गये। एक अप्रत्याशित मुलाकात थी वह। नौकरी लगी। शादी हुई। मैं घर के कामों में उलझता गया। मेरा ननिहाल जाना कम होता चला गया। फिर भी साल भर में एकाध चक्कर तो लगा ही लेता हूँ। एक-दो दिन के लिए ही सही। More Likes This When Stranger Fall in love - 1 द्वारा silent Shivani उभरा इश्क - 1 द्वारा Sonali Rawat पहला प्यार : अनकहा एहसास - भाग 1 द्वारा Himanshu Shukla तेरी मेरी कहानी - 1 द्वारा smita इस घर में प्यार मना है - 4 द्वारा Sonam Brijwasi अनोखी प्रेम कहानी - 1 द्वारा kuldeep Singh दो पतियों की लाडली पत्नी - 1 द्वारा Sonam Brijwasi अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी