कहानी में, लेखक और उसका दोस्त श्याम एक बस अड्डे पर हैं, जहाँ वे श्याम की बुआ जी का इंतज़ार कर रहे हैं। वहाँ कुछ बच्चे भीख मांगने आते हैं, लेकिन श्याम उन्हें दूर भगाने लगता है। लेखक बच्चों को प्रसाद देने का सुझाव देता है, और वे प्रसाद बांटने लगते हैं। एक मुस्लिम बच्चा, जो दूर बैठा है, उदास नजर आता है। जब लेखक उसे प्रसाद देने की कोशिश करता है, तो श्याम उसे रोकता है, यह कहते हुए कि वह मुस्लिम है और इसलिए नहीं आएगा। लेकिन लेखक बच्चे से पूछता है, और बच्चा प्रसाद स्वीकार कर लेता है। जब बच्चा और लड्डू मांगता है क्योंकि उसके घर में कुछ खाने को नहीं है, तो लेखक उसे और लड्डू देता है। यह घटना लेखक और श्याम को सोचने पर मजबूर कर देती है कि गरीबी और भूख किसी भी धर्म, जाति, या भेदभाव से बड़ी होती है। कहानी का अंत लेखक के मन में उस बच्चे के विचारों के साथ होता है, जब वे बुआ जी के साथ गाड़ी में बैठते हैं।
भूख...
Sarvesh Saxena
द्वारा
हिंदी प्रेरक कथा
Four Stars
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विवरण
आज मंगलवार है | मैं और श्याम चौराहे के पास वाले हनुमान मंदिर में प्रसाद चढ़ा के सीधा श्याम की बुआ जी को लेने बस अड्डे पहुंच गए, बस लेट थी, इसीलिए हमने वहीँ बैठकर बुआ जी की बस का इंतजार करना सही समझा | मुझे अक्सर भीड़ भाड़ वाली जगहों पे जाना बिल्कुल पसंद नहीं था लेकिन बात दोस्त की थी तो मैं बैठ गया | हम दोनों बस अड्डे के बाहर बात कर रहे थे और श्याम तो हर आने जाने वाली सवारी को देख के कोई ना कोई बात उसके बारे मे बताता |हमे अभी थोड़ी ही
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