की भरमार हो गई है। ये फेसबुकिया बुद्धिजीवी केवल सोचते हैं और अपने विचारों को सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। वे हर मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करते हैं, लेकिन वास्तविकता में कोई सक्रिय कदम नहीं उठाते। उनका जीवन केवल विचारों और बहसों में व्यतीत होता है, जबकि वे वास्तविकता से दूर रहते हैं। पहले के बुद्धिजीवी सिगरेट और शराब के साथ बहस करते थे, जबकि आज के बुद्धिजीवी फेसबुक के माध्यम से अपनी सोच को साझा कर रहे हैं। यह कहानी उन बुद्धिजीवियों के बारे में है जो केवल सोचते हैं, लेकिन कुछ करने का साहस नहीं रखते। फेसबुकिया बुद्धिजीवी Arvind Kumar द्वारा हिंदी हास्य कथाएं 30.9k 2.9k Downloads 12.9k Views Writen by Arvind Kumar Category हास्य कथाएं पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण फेसबुक ने आज न सिर्फ लोगों को सामाजिक रूप से एक दूसरे से जुड़ने का अवसर दिया है, बल्कि लोगों को अपने विचारों को अभियक्त करने के लिए एक सुगम मंच भी प्रदान किया है. पर इसी फेसबुक ने कुछ लोगों को एक ऐसा बुद्धिजीवी भी बना दिया है, जो कुछ करते धरते नहीं है, पर अपने आप को हर विषय का ज्ञाता समझते हैं. मेरा यह व्यंग्य ऐसे ही लोगों पर भरपूर तंज़ कसता है. More Likes This साहित्य का सर्कस - 1 द्वारा rakshita pal रांड का संड - भाग 1 द्वारा Renu Chaurasiya Conversations With Myself - 4 द्वारा Aarushi Singh Rajput पिंकू की परी - 1 द्वारा Deepak Kumar Tiwari वेरियन के आसमान का खूंखार ताज - 4 द्वारा sukhvinder Singh Rai प्यार भी तुमसे और टकरार भी - 1 द्वारा July Writes Mr. Ms. Fake - एपिसोड 1 द्वारा kajal jha अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी