कहानी "क्लासमेट" में विपिन एक सरकारी दफ्तर के कामकाज से परेशान है। वह नगर परिषद में मकान का नक्शा पास करवाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे वहां की भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता से निराशा हो रही है। विपिन सरकार के कर्मचारियों के काम करने के ढंग पर सवाल उठाते हुए सोचता है कि लोग नौकरी पाने के बाद अपने सिद्धांतों को भूल जाते हैं। उसे अपने पुराने दोस्त बल्लू की याद आती है, जो अब नगर परिषद का आयुक्त बन गया है। विपिन और बल्लू ने एक साथ स्कूल में पढ़ाई की थी और उनकी दोस्ती के किस्से मशहूर थे। हालांकि, अब विपिन को बल्लू के बारे में सोचकर निराशा महसूस होती है, क्योंकि वह भी अब सिस्टम का हिस्सा बन गया है। कहानी सरकारी तंत्र में व्याप्त समस्याओं और व्यक्तिगत रिश्तों की जटिलताओं को उजागर करती है। क्लासमेट Krishan Kumar Ashu द्वारा हिंदी लघुकथा 11.7k 2.4k Downloads 16.6k Views Writen by Krishan Kumar Ashu Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण 'मकान का नक्शा न हुआ। ताजमहल का टेंडर हो गया। आखिर कब तक चक्कर लगवाएंगे ये लोग? बड़बड़ाते हुए विपिन नगर परिषद परिसर में ही बनी कैंटीन में आकर बैठ गया। More Likes This ठुकराईन नयना देवी - 3 द्वारा Vandna Sharma लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 1 द्वारा Std Maurya दिल्ली जिमखाना क्लब द्वारा Devendra Kumar Fake Boyfriend real Feelings - 1 द्वारा Mawaskar Pratigya कॉल - 1 द्वारा sky कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 द्वारा miss k पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी