स्वाभिमान - लघुकथा - 43 Shobha Rastogi द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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स्वाभिमान - लघुकथा - 43

Shobha Rastogi द्वारा हिंदी लघुकथा

“सुनो ! तुम मुझे तुम्हारे वियोग के गहरे अहसास में अर्धचेतन-सा छोड़ गए थे। अपना जीवन स्वाहा करने की मंशा लिए मैंने जाना कि नवांकुर फूट गया है। तब से अब तक पल-पल, क्षण क्षण तुम्हे नैनों में बिठा ...और पढ़े


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