यह कहानी एक व्यक्ति की है, जिसकी इच्छा सौ साल जीने की थी। जब वह पिछले साल उनसे मिला, तो उन्होंने कहा कि उनके पास अभी ग्यारह साल बाकी हैं। हाल ही में, उन्हें बताया गया कि वे बहुत बीमार हैं और बचने की कोई आशा नहीं है। इस खबर के बाद, वह हल्द्वानी पहुंचता है, जहां वह अस्पताल में भर्ती होते हैं। उनकी हालत गंभीर है, लेकिन वे सभी को पहचानते हैं। कुछ समय बाद, वह पहाड़ों की यात्रा पर जाने का विचार करते हैं। टैक्सी में बैठते समय, ड्राइवर उन्हें बताता है कि आगे की सीट एक महिला ने ले ली है। टैक्सी यात्रा के दौरान, वह एक पुरानी गाने की पंक्तियों को याद करते हैं। एक होटल में रुकने के बाद, वह एक अजीब सपने में खो जाते हैं, जिसमें एक महिला उन्हें आकर्षित करती है और उनके लिए खाना बनाती है। इसके बाद, वह नन्दा देवी के मंदिर जाते हैं, जहां शांति का अनुभव करते हैं। वह वहां प्रार्थना करते हैं कि उनकी इच्छा पूरी हो और अगर यह संभव नहीं है, तो उन्हें शरीर से मुक्ति दी जाए। अंत में, वह मंदिर का इतिहास पढ़ते हैं और परिसर से बाहर निकलते हैं। उनकी इच्छा सौ साल जीने की थी महेश रौतेला द्वारा हिंदी यात्रा विशेष 4.6k 2.2k Downloads 7k Views Writen by महेश रौतेला Category यात्रा विशेष पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण उनकी इच्छा सौ साल जीने की थी। पिछले साल उनसे मिलने गया तो बोले अभी ग्यारह साल और हैं। इस बार खबर मिली कि बहुत बीमार हैं, बचने की कोई आशा नहीं है। सुनकर, जहाज का टिकट कराया और दिल्ली से रेल में तत्काल टिकट करने का अनुरोध किया। हल्द्वानी पहुंचा। वे आई सी यू में भर्ती थे। गुर्दे कमजोर हो चुके थे, फेफड़े भी रोगग्रस्त थे। लेकिन सबको पहिचान रहे थे। कुछ दिन अस्पताल में आना-जाना होता रहा। एक दिन विचार आया पहाड़ों में मन को भरमाया जाय। अस्पताल में लगता है सारी दुनिया बीमारियों से जूझ रही है। छोटा बैग तैयार किया, ई रिक्शा में बैठा। उतरते ही अल्मोड़ा जाने वाली टैक्सी का ड्राइवर मिला। बोला अल्मोड़ा की एक सीट खाली है, जाना है। मैं बिना गंतव्य के निकला था तो हाँ बोल दिया। और उससे कहा आगे की सीट चाहिए क्योंकि उम्र अधिक है,वरिष्ठ नागरिक हूँ। वह बोला आगे की सीट आपसे भी अधिक उम्र की महिला ने ले ली है। लगभग पचहत्तर साल की होगी। टैक्सी में बैठा तो देखा आगे की सीट पर बीस-बाईस साल की युवती बैठी है। मैं मन ही मन मुस्कराया लेकिन कुछ बोला नहीं। More Likes This हंटर - 1 द्वारा Ram Make अकेली दुनिया - 1 द्वारा prashant raghav कांचा - भाग 2 द्वारा Raj Phulware अंतरा - भाग 1 द्वारा Raj Phulware संस्कृति का पथिक - 1 द्वारा Deepak Bundela Arymoulik सत्रह बरस की तन्हा कहानी - 1 द्वारा yafshu love कलकत्ता यात्रा (प्रथम संस्मरण ) द्वारा नंदलाल मणि त्रिपाठी अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी