कुलदीप अपने सूटकेस के साथ स्टेशन पर पहुँचे, लेकिन उन्हें लेने कोई नहीं आया। उन्होंने अपने चचेरे भाई के बेटे से मिलने की उम्मीद की थी, पर वह नहीं दिखा। थोड़ी देर सोचने के बाद, उन्होंने स्टेशन के बाहर जाने का निर्णय लिया। बाहर निकलते ही उन्हें चाय की दुकान दिखाई दी, और उन्हें अपनी थकान का एहसास हुआ। लंदन से दिल्ली की लंबी यात्रा के बाद, उन्होंने चाय की सख्त आवश्यकता महसूस की और चाय बनाने के लिए कहा। चाय पीते हुए उन्होंने चारों ओर देखा। अपनी देहरी Ashish Kumar Trivedi द्वारा हिंदी लघुकथा 1.5k 1.4k Downloads 4.7k Views Writen by Ashish Kumar Trivedi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण कुलदीप ने ने अपना सूटकेस गाड़ी से उतारा। कुछ समय इधर उधर देखते रहे। पर उन्हें लेने कोई नहीं पहुँचा था। उन्होंने अपने आने की सूचना तो दी थी। फोन पर बात हुई थी कि उनके चचेरे भाई का बेटा उन्हें लेने स्टेशन आएगा। पर वह तो दिखाई नहीं पड़ रहा था। कुछ क्षण अनिश्चय में खड़े रहे। क्या करें समझ नहीं आ रहा था। बहुत समय के बाद यहाँ आए थे। आगे की यात्रा कैसे करनी है मालूम नहीं था। फिर सोंचा पहले स्टेशन के बाहर चलते हैं फिर आगे देखेंगे। स्टेशन के बाहर निकले तो सामने चाय More Likes This ठुकराईन नयना देवी - 3 द्वारा Vandna Sharma लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 1 द्वारा Std Maurya दिल्ली जिमखाना क्लब द्वारा Devendra Kumar Fake Boyfriend real Feelings - 1 द्वारा Mawaskar Pratigya कॉल - 1 द्वारा sky कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 द्वारा miss k पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी