कहानी "धन की भेंट" में वृन्दावन कुण्डू और उसके पिता जगन्नाथ कुण्डू के बीच के संघर्ष को दर्शाया गया है। वृन्दावन अपने पिता से विदाई लेना चाहता है, जबकि उसके पिता उसे उसके पालन-पोषण पर खर्च किए गए धन का याद दिलाते हैं। जगन्नाथ एक सादा जीवन जीता है और प्राचीन आदर्शों का पालन करने की कोशिश करता है, लेकिन वृन्दावन विवाह के बाद भौतिक सुखों की ओर आकर्षित हो जाता है और अपने पिता के आदर्शों को त्याग देता है। इस परिवर्तन के कारण पिता-पुत्र के बीच में झगड़े शुरू हो जाते हैं, जो तब और बढ़ जाते हैं जब वृन्दावन की पत्नी बीमार पड़ जाती है। जब वैद्यराज उच्च मूल्य की दवा की सलाह देते हैं, तो जगन्नाथ उन्हें घर से निकाल देते हैं, जिससे वृन्दावन का गुस्सा और बढ़ जाता है। अंततः, जब उसकी पत्नी की मृत्यु होती है, तो वह अपने पिता को दोषी ठहराता है। जगन्नाथ उसे समझाने की कोशिश करता है कि जीवन और मृत्यु का एक निश्चित क्रम है और मूल्यवान दवाइयाँ भी जीवन नहीं बचा सकतीं। कहानी में पारिवारिक संबंधों, संघर्षों और जीवन के अनिवार्य सत्य को दर्शाया गया है। धन की भेंट Rabindranath Tagore द्वारा हिंदी लघुकथा 11.6k 4.8k Downloads 25.2k Views Writen by Rabindranath Tagore Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Dhan ki bhet More Likes This किराए का घर द्वारा Vandna Sharma First Love - 1 द्वारा Sah Ankita जिस जीवन में तुम थे - 2 द्वारा SHREYA INDUSHREE तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अलविदा आनंद! द्वारा Devendra Kumar आग और ठहराव - 1 द्वारा Alka rahul Aggarwal अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी