स्वयं को स्वीकार करें दूसरों की राय आपके बारे में इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपने बारे में क्या सोचते हैं। यदि आप आत्मविश्वास से भरे हैं और अपनी शारीरिक सीमाओं को बाधा नहीं मानते, तो लोग आपको वही प्यार और सम्मान देंगे जिसके आप हकदार हैं। इस संदर्भ में, पंचकुला, हरियाणा के सुमित मेहता का दृष्टिकोण विशेष है। वे Congenital Myopathy नामक बीमारी से ग्रसित हैं, लेकिन उन्होंने कभी खुद को अक्षम नहीं समझा। वे एक स्वतंत्र आईटी सलाहकार और सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हैं, साथ ही शास्त्रीय संगीत में स्नातक भी हैं। सुमित का बचपन सामान्य बच्चों की तरह बीता। वे अपनी ट्राइसिकल पर बैठकर अपने दोस्तों के साथ खेलते रहे और मोहल्ले में सभी के प्रिय बने। उनके माता-पिता ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया कि वे खुद को किसी से कम न समझें। सुमित को एक बार अपने भाई-बहनों के साथ खेलते समय अपनी कमी का एहसास हुआ, जब वे सीढ़ियाँ चढ़कर आगे बढ़ गए और वह पीछे रह गए। इस घटना ने उन्हें रोने पर मजबूर कर दिया, लेकिन उनकी माँ ने उन्हें समझाया कि वे कई चीजें कर सकते हैं, भले ही कुछ चीजें नहीं कर सकते। इसने सुमित को आत्मविश्वास दिया और उन्होंने अपनी कमियों को लेकर कभी दुखी नहीं हुए। सुमित की बीमारी के शुरूआती दौर में उनके माता-पिता ने चिकित्सा का भरसक प्रयास किया, लेकिन जब कोई लाभ नहीं हुआ, तो उन्होंने धैर्य से काम लिया। उन्होंने सुमित की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया और उसे स्कूल में दाखिल कराया। सुमित ने आठवीं तक की शिक्षा प्राप्त की और इस दौरान संगीत एवं स्केचिंग में भी रुचि दिखाई, जिसमें उन्होंने कई पुरस्कार जीते। आठवीं के बाद, सुमित ने राष्ट्रीय ओपन स्कूल से दसवीं और बारहवीं की परीक्षा पास की और संगीत में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। संगीत से उनका गहरा प्रेम था, लेकिन उनके जीवन में बदलाव तब आया जब कंप्यूटर ने उनके जीवन में प्रवेश किया। कंप्यूटर के प्रति उनकी जिज्ञासा ने उन्हें और जानने के लिए प्रेरित किया। स्वयं को स्वीकार करें Ashish Kumar Trivedi द्वारा हिंदी प्रेरक कथा 9.1k 2.1k Downloads 6.6k Views Writen by Ashish Kumar Trivedi Category प्रेरक कथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण यह एक सच्ची प्रेरणदायक कहानी है। सुमित मेहता ने शारीरिक अक्षमता को बाधा नहीं समझा बल्कि हिम्मत से उसका सामना किया। उनका मानना है कि दूसरे आपके बारे में क्या राय रखते हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने बारे में क्या राय रखते हैं। यदि आप आत्मविश्वास के साथ लोगों से मिलते हैं अपनी शारीरिक कमी को बाधा नही समझते तो लोग आपको वही प्यार और सम्मान देंगे जिसके आप हकदार हैं। More Likes This अधूरी उड़ान - 1 द्वारा priyanshi bhuva अधूरापन - 1 द्वारा Falguni Dost ज़हरीली थाली द्वारा sukhvinder Singh Rai पीछे छूटा इंसान- भाग 1 द्वारा RAVINDRA बिन माँ की रसोई द्वारा sukhvinder Singh Rai भरोसे का खून द्वारा sukhvinder Singh Rai अपनों का नकाब: खून से गहरा दर्द द्वारा sukhvinder Singh Rai अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी