इस कहानी में, नीतू और मीनू झूले पर बैठी हैं और कोई और लड़का, मनीषा, उनकी बारी का इंतज़ार कर रहा है। मनीषा झूले पर बैठने का मौका पाने के लिए उत्सुक है, लेकिन नीतू और मीनू झूले को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। मीनू को नीतू के नए जूतों पर ध्यान जाता है, और वह उनकी तारीफ करती है। दोनों के बीच जूतों की चर्चा होती है, जहां मीनू अपने पापा की सराहना करती है कि उन्होंने उसे नए जूते दिलवाए। मनीषा अपनी स्थिति को लेकर निराशा महसूस करती है क्योंकि उसे नए जूते नहीं मिले हैं और वह अपने पापा की डांट का जिक्र करती है। कहानी बच्चों के बीच दोस्ती, प्रतिस्पर्धा, और जूतों के प्रति आकर्षण दर्शाती है। जूते Neetu Singh Renuka द्वारा हिंदी लघुकथा 2.4k 2.9k Downloads 9.5k Views Writen by Neetu Singh Renuka Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण मीनू को लाख मिन्नतों के बाद भी स्कूल के लिए नए जूते नहीं दिलाए जा रहे थे। और क्यूँ दिलाए जाते भला जब पहले वाले सही सलामत थे। फिर मीनू ने क्या किया, पढ़िए इस चौथी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों पर लिखी गई कहानी में। More Likes This खामोश बेटी - 1 द्वारा blue sky and purple ocean मुक्त - भाग 14 द्वारा Neeraj Sharma पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1 द्वारा Anil Kundal Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther सजा.....बिना कसूर की - 1 द्वारा Soni shakya प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी