दिनेश एक थकाऊ दिन के बाद घर लौटता है और अपनी पत्नी कुसुम से एक शादी के निमंत्रण पत्र पर चर्चा करता है। कुसुम को अपनी मौसी की बेटी की शादी में कुछ देना है, लेकिन दिनेश के पास पैसे की कमी है। उनकी बातचीत में तनाव बढ़ता है, जिससे दिनेश गुस्से में घर से बाहर निकल जाता है। कुसुम और उसकी सास दोनों दिनेश की स्थिति को समझती हैं, लेकिन कुसुम को लगता है कि उसे सही समय पर बात करनी चाहिए थी। दिनेश बाहर जाकर अपनी परेशानियों के बारे में सोचता है, जिसमें आर्थिक तंगी और काम का दबाव शामिल है। वह अपनी मेहनत के बावजूद जीवन की छोटी-छोटी चीजों के लिए तरसने का अनुभव कर रहा है। सौर Ashish Kumar Trivedi द्वारा हिंदी लघुकथा 2.6k 2.1k Downloads 6.3k Views Writen by Ashish Kumar Trivedi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण घर से निकल कर दिनेश यूँ ही सड़क पर चलने लगा। उसकी आमदनी की सौर इतनी छोटी थी की पाँव सिकोड़ते सिकोड़ते घुटने दुखने लगे थे। उसके मन के भीतर बहुत कुछ चल रहा था। क्या ज़िन्दगी है दिन भर खटने के बाद भी छोटी छोटी चीज़ों के लिए तरसना पड़ता है। More Likes This उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3 द्वारा Soni shakya शनिवार की शपथ द्वारा Dhaval Chauhan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी