अध्याय 1: रणविजय शेखावत उसका नाम रणविजय शेखावत है। पूरी दुनिया उसे एक बेरहम, पत्थर दिल और 'कोल्ड प्रिंस' के नाम से जानती है। वह सिर्फ एक हैंडसम बैचलर ही नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड का एक बेहद खूबसूरत और खूंखार माफिया भी है। उसकी ज़िंदगी का केवल एक ही नियम और एक ही लक्ष्य है—सिर्फ काम और कामयाबी।
Mafia King - 1
अध्याय 1: रणविजय शेखावतउसका नाम रणविजय शेखावत है। पूरी दुनिया उसे एक बेरहम, पत्थर दिल और 'कोल्ड प्रिंस' के से जानती है। वह सिर्फ एक हैंडसम बैचलर ही नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड का एक बेहद खूबसूरत और खूंखार माफिया भी है। उसकी ज़िंदगी का केवल एक ही नियम और एक ही लक्ष्य है—सिर्फ काम और कामयाबी।शेखावत साम्राज्य का परिवार:रणविजय के आलीशान घर में उसकी माँ मीरा शेखावत, पिता विनोद शेखावत और उसकी चुलबुली, चंचल बहन परी शेखावत रहते हैं। इस राजघराने जैसे परिवार के मार्गदर्शक उसके दादा-दादी, महेश और मोहिनी शेखावत हैं।पूरे घर की कमान दादा जी (महेश शेखावत) के ...और पढ़े
Mafia King - 2
अंकिता डर तो गई थी, लेकिन उसने खुद को संभालते हुए सर से बात की। उधर, Ranvijay का गुस्सा बढ़ता जा रहा था। जब अंकिता ने भी पलटकर कड़े शब्दों में कहा, "क्या करोगे तुम? फ़ोन पर खुद को शेर समझते हो, अगर सामने होते तो पता नहीं तुम्हारा क्या हाल करती! मुझे धमकी देने की कोशिश मत करो, ये धमकी उसे देना जो तुमसे डरता हो। मैं तुमसे बिल्कुल नहीं डरती।"अंकिता को अंदाज़ा भी नहीं था कि वह किससे टकरा रही है—वह साक्षात "Mafia King" था। यह बदतमीजी सुनकर Ranvijay का खून खौल उठा। उसने तुरंत शिवाय को ...और पढ़े
Mafia King - 3
जैसे ही अंकिता की बात खत्म हुई, उसने मुस्कुराते हुए पूछा— "तो सर, आप इनमें से कौन सा प्लान पसंद करेंगे?" रणविजय का सब्र का बांध टूट गया। उसने बेहद कड़क और तीखे लहजे में कहा— "तुम्हारी कंपनी के दिन इतने बुरे आ गए हैं जो कटोरा लेकर सड़कों पर भीख मांग रही है? अगर पैसों की इतनी ही किल्लत है, तो अपनी औकात में रहो... मैं चाहूँ तो पलक झपकते ही तुम्हारी पूरी कंपनी को खरीदकर बंद करवा सकता हूँ!" रणविजय के इस तीखे और बेबाक हमले को सुनकर अंकिता के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसके हाथ ...और पढ़े
Mafia King - 4
रणविजय ने अंकिता को बिस्तर पर धक्का दिया और गुस्से से उसकी ओर बढ़ा। उसने उसका जबड़ा कसकर पकड़ और दबी आवाज़ में बोला, "तुम्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।" उसी समय उसके फोन की घंटी बज उठी। स्क्रीन पर उसके असिस्टेंट का नाम चमक रहा था। उसने झुंझलाकर अंकिता को छोड़ दिया, कॉल रिसीव की और बिना कुछ कहे कमरे से बाहर निकल गया। जाते-जाते उसने एक ठंडी, कठोर नज़र अंकिता पर डाली। अंकिता वहीं फर्श पर बैठ गई। उसके हाथ काँप रहे थे, आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे। रोते-रोते कब उसकी आँख लग गई, ...और पढ़े
Mafia King - 5
-धीरे रात हो गई। रणविजय अपने कमरे में आया। उसकी नज़र बिस्तर पर गहरी नींद में सोई अंकिता पर वह इतनी खूबसूरत लग रही थी कि किसी भी हीरोइन की खूबसूरती उसके सामने फीकी पड़ जाए। कुछ पल के लिए रणविजय का गुस्सा और नफ़रत उसके मन की उलझनों में खो गए। उसने खुद को समझाने की कोशिश की, लेकिन उसकी नज़रें बार-बार अंकिता पर ही टिक जाती थीं।वह धीरे-धीरे उसके करीब आया और अनायास ही उसके होठों को चूम बैठा। उस पल वह अपनी सारी नफ़रत भूल चुका था और बस अपनी भावनाओं में बह गया था।कुछ देर ...और पढ़े
Mafia King - 6
जगह कोई आम ठिकाना नहीं, बल्कि 'रॉयल फिटनेस होटल' था। बाहर से देखने में ये एक आलीशान होटल लगता पर अंदर रणविजय का काला साम्राज्य चलता था। वहाँ उसके खतरनाक बॉडीगार्ड्स 24 घंटे तैनात रहते थे, जिनकी एक गलती मतलब सीधे मौत।अंकिता को वहाँ कैद हुए काफी दिन हो गए थे। उसे पता था कि अगर वह पकड़ी गई, तो रणविजय उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा। लेकिन कहते हैं न कि हर शैतान से कोई न कोई गलती जरूर होती है।एक दिन रणविजय किसी बहुत बड़े काम में फंसा हुआ था। होटल में कोई वीआईपी मेहमान आने वाले थे, जिसकी ...और पढ़े
Mafia King - 7
हॉस्पिटल से बाहर निकलते ही ऐसा लग रहा था जैसे अंकिता और उसकी माँ की दुनिया एक ही पल उजड़ गई हो। दोनों की आँखें खुली थीं, लेकिन होश कहीं खो चुके थे। सड़क पर लोग आ-जा रहे थे, गाड़ियाँ दौड़ रही थीं, लेकिन उन्हें न किसी की आवाज़ सुनाई दे रही थी और न ही अपने आसपास की कोई चीज़ दिखाई दे रही थी। बस दोनों चुपचाप एक-दूसरे का सहारा लेकर चलते जा रही थीं।काफी देर तक यूँ ही भटकने के बाद किसी तरह वे अपने घर पहुँचीं। घर का दरवाज़ा बंद होते ही अंकिता फूट-फूटकर रो पड़ी। ...और पढ़े
Mafia King - 8
उधर, रणविजय का गुस्सा दिन-ब-दिन और ज्यादा बढ़ता जा रहा था। सात महीने, आठ महीने, नौ महीने बीत चुके लेकिन उसका पूरा नेटवर्क नाकाम साबित हो रहा था। अंकिता का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। जिस लड़की को उसने एक हफ्ते में अपना गुलाम बनाने की कोशिश की थी, आज वही उसके हाथ से रेत की तरह फिसल गई थी। उसका पारा हर दिन और हाई होता जाता। वो दफ्तर के उस कमरे में घंटों बैठा रहता, जहाँ उसने अंकिता को कैद रखा था। वह स्क्रीन पर वही पुरानी वीडियो देखता रहता और गुस्से में कांच के ...और पढ़े
Mafia King - 9
दिन बीतते गए और अंकिता व परी की बचपन की दोस्ती फिर से परवान चढ़ने लगी। अंकिता अक्सर परी घर जाने लगी। परी की माँ अंकिता को अपनी बेटी की तरह मानती थीं। वे बहुत अमीर थे, लेकिन उनका दिल बहुत बड़ा था—उनकी सोच बहुत नेक थी, जो अंकिता के लिए एक सुकून की बात थी।पूरा एक महीना बीत गया। इस बीच रणविजय उस घर में होने के बावजूद अंकिता की नजरों से दूर ही रहा। रणविजय को इस बात की भनक तक नहीं थी कि जिस लड़की की तलाश में उसने मुंबई शहर को खंगाल डाला था, वो ...और पढ़े
Mafia King - 10
हॉल का नज़ारा एकदम अलग था। धूप खिड़की से छनकर आ रही थी और फर्श पर चारों तरफ रंगों निशान और बिखरे हुए स्केच थे। रणविजय अभी-अभी उस मासूम बच्ची के साथ एक अजनबी सा रिश्ता महसूस करने लगा था। तभी उसकी माँ हॉल में आई। बच्ची को रणविजय की गोद में या यूँ कहें कि रणविजय को एक बच्ची के साथ खेलते देख, माँ की आँखें भर आईं।माँ धीरे से उनके पास आईं और रणविजय के कंधे पर हाथ रखा। उनकी आवाज़ में एक ममता भरी टीस थी, "बेटा... देख इसे। कितनी रौनक है न घर में? तू ...और पढ़े
Mafia King - 11
देखते ही देखते पूरा केबिन खाली हो गया, अब वहां सिर्फ अंकिता बची थी। जैसे ही वह वहां से के लिए उठी, उसकी नजर हेड चेयर पर पड़ी। उस शख्स को देखते ही अंकिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। रणविजय के चेहरे पर जो गुस्सा, डर और नफरत का मिश्रण था, उसे देखकर अंकिता बुरी तरह कांपने लगी। वह जैसे ही वहां से भागने की कोशिश करने लगी, रणविजय ने बिजली की फुर्ती से उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ जोर से खींचा। झटके से अंकिता सीधे उसके सीने से जा टकराई। उसके बिखरे हुए बाल उसके ...और पढ़े