मिले जब हम तुम - 15











                              भाग - 15

   



            पाठकगणो से अनुरोध हे... यह पार्ट पढने से पहले मेरी प्रोफ़ाइल मे जाकर यह कहानी के आगे के पार्ट अवश्य पढे...🙏🙏🙏🙏

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                  देव मुश्कुराहता हुआ आद्रिती के सामने से निकल गया... आद्रिती बस उसे जाता देखती रही और मन ही मन सोचने लगी कितना बदमाश हे ये... हिरोगीरी दिखाने का एक भी मौका नही छोडता हे... थोडी दुर जाकर देव पीछे मुड़कर देखता हे आद्रिती अपने ही विचार मे मस्त थी... उसने वही से आवाज दी... चलना नही हे क्या मैडम या यही रुकना हे...  आद्रिती कुछ बोलती उसे पहले वहा करन आ जाता हे... और गुस्से मे वही बैठ जाता है... देव उसे देख आद्रिती की तरफ देखकर इशारा करता है... तो आद्रिती अपने कंधे उचका देती हे...

               क्या हुआ मेरी अनारकली... रोनी सूरत क्यू बनाई है... देव करन का उतरा हुआ चेहरा देख कहता है... करन चिढते हुए कहता है... खुदतो दिति के साथ मजे कर रहा है और यहा मेरे ओर आरती के बीचमें सबको कबाब मे हड्डी बनने का शोख चढा है... अगर एसा ही चलता रहा तो गाँव बसने से पहले ही उजद जाएगा... यह सुन देव और आद्रिती हस देते है... इससे करन और खीज जाता है हस लो बेटा देखना एक दिन मे भी हसुँगा तुम दोनों की हालत पर... इतने मे आरती करन को ढुंढते हुए वहा आती हे... आरती को देख करन ने अपना मुँह फेर लिया... इससे आरती अपने दोनों कान पकडकर उसके सामने घुटनों पर बैठ जाती है... यह देख करन मुश्करा जाता हे और आरती को गले से लगा लेता है... इतने मे सभी लोग आ जाते हे... सभी नाश्ता कर अपने अपने घर के लीए निकलते हे... आद्रिती और आरती ने भी सब से विदा ली और कहा की आज का दिन मजेदार बनाने के लीए आप सबका दिल से थैंक्यू... हमे अपने ग्रुप मे सामील करने के लीए... यह सुन सभी एकदुसरे को देखने लगते हे और फिर हस देते है... फिर एक ग्रुप हग के साथ सब विदा लेते है... अगले दिन सनडे था तो सब उदास भी हुए और जल्दी मिलने का कहा... देव और करन उन दोनों को जाता हुआ देखते रहे... करन ने तो तो भी अपने प्यार का इजहार कर दिया था पर देव उसने तो अभी तक आद्रिती से कुछ कहा ही नही... शायद आगे भी न कह पाए...

                 यार करन तुने आरती का फोन नंबर लिया है न...? नही यार देव उन दोनों के पास फोन नही है... वोह्ट जाह्नवी ने अपनी आँखो को और बडी बडी करके कहा... तो करन ने कहा... - " हा सच मे उन दोनों के पास फोन नही है क्यूकी उन्हें कभी जरूर भी नही पडी..." हम्ममममम अब सोमवार तक इंतजार करे बीना और कोई रास्ता भी नही है यही सब बाते कोंन्फरेन्स कोल पर करते करते सभी दोस्त अपने अपने घर पहुँच जाते हे... उधर आरती और आद्रिती भी होस्टेल पहुंच जाती है...

                थकान के कारण बिस्तर पर पडते ही आरती को नींद आ जाती है... लेकिन आद्रिती देव के ही ख्यालो मे खोई हुई थी... और दिलमे जो नए एहसास पनप रहे थे उनको समझने की कोशिश करती हे... उधर देव भी आद्रिती के ख्यालो मे नींद की आगोश मे चला जाता है...

               सूरज कि पहली किरण खिदकी से जाकती हुई आद्रिती पर पड़ती है और उसे सपनो कि दुनिया से निकालकर वर्तमान मे लाती है... दिति ने देखा कि आरती अब भी सोई हुई हे वह उसे देख मुशकराई और खिदकी के पास जाकर बहार का नजारा देखने लगी... ठंडी हवाओ मे उसने अपने दोनों हाथ फैलाकर आँखे बंद कर उस समय को महसूस कर रही थी जब वह देव के साथ थी... तभी कोई उसके करीब आता है जिसे देख दिति के होठो पर प्यारी मुश्कान छा जाती है... वह और करीब आ रहा था इतना करीब की उसकी गरम साँस दिति के गालों पर महसूस हो रही थी... वह होठो के बिलकुल करीब था और धीरेसे दिति के माथे को अपने होठो से छू लिया... इस एकसास से दिति अपनी आँखे खोल देती है और आसपास देखती हे पर उसे कोई नजर नही आता... और अपने सर को ठपकी देते हुए कहा... - "  दिति यह तुझे क्या हो रहा है... खुली आँखो से भी देव के सपनो मे खोई हे तू..."  फिर उसने अपने घुंघरु उठाए और रेडियो ओन करा और उसीके ताल पर अपने पैरो की थाप मिलाने लगी...


मेरे दिल को ये क्या हो गया
मैं ना जानूँ कहाँ खो गया
क्यों लगे दिन में भी रात है
धूप में जैसे बरसात है
ऐसा क्यों होता है बार-बार
क्या इसको ही कहते हैं प्यार

आ आ आ आ आ

हो सपने नए सजने लगे दुनिया नई लगने लगी
पहले कभी ऐसा ना हुआ क्या प्यास ये जगने लगी
मदहोशियों का है समा
वो झुकने लगा आसमाँ
ख़ामोशी बनी है ज़ुबाँ
छेड़े है कोई दास्ताँ
धड़कन पे भी छाया है ख़ुमार
ऐसा क्यों होता है बार-बार

हो आईने में जो देखा तुझको
आई शरम आँखें झुकीं
धक से मेरा धड़का जिया
एक पल को ये साँसें रुकीं
अब चूड़ी सताने लगी
रातों को जगाने लगी
मैं यूँही मचलने लगी
कुछ-कुछ बदलने लगी
जाने रहती हूँ क्यों बेक़रार
ऐसा क्यों होता है बार-बार

मेरे दिल को ये क्या हो गया ... कहते हैं प्यार
ऐसा क्यों होता है बार-बार
क्या इसको ही कहते हैं प्यार

क्रमशः

@komal Talati


             


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Neel Raval

Neel Raval 7 दिन पहले

Jyothi Bn

Jyothi Bn 3 सप्ताह पहले

Ajantaaa

Ajantaaa 4 सप्ताह पहले

Komal Talati

Komal Talati सत्यापित यूजर 1 महीना पहले

Manbir

Manbir 1 महीना पहले