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क्लासें ख़त्म होते ही पूरा कॉलेज कैंपस गुलजार था।इधर-उधर स्टूडेंट्स टहल रहे थे,...
भूतिया हवेली का रहस्यरांची के बाहरी इलाके में, घने जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली...
एपिसोड: 'शून्य का स्पंदन' — महा-चेतना का जागरण1. 'अनकहे' की गूँज...
वर्धान अपनी नम आंखों और दुनिया जीत लेनी वाली मुस्कान से : मै......और फिर —कुछ य...
जाड़ों में जब वृक्ष एकदम रूखे और नंगे हो जाते हैं यहां तक कि उनकी चमड़ी भी उधड़न...
इंसानियत का इनाम कमल चोपड़ाएक गाँव के एक सेठ का किसी ने दरवाजा खटखटाया। रात का...
Episode -5 (खूनी कश्मकश) अस्पताल की सफेद दीवारों के पीछे छिपे राज़ अब धीरे-धीरे...
: : प्रकरण -75 : : ...
स्नेहिल नमस्कार प्रिय मित्रों मधुशाला...??? =======&...
__समर्पित पुरुष___एक पुरुष के लिए बेहद कठिन है प्रेम कर पाना और उससे भी कठिन शाय...
Karan Thakur उम्र (26) – शांत, समझदार, काबिल AI इंजीनियर। Kabir Thakur उम्र (25) – चुलबुला, मासूम, तेज दिमाग वाला AI डेवलपर। Shreya Sharma उम्र (23) – सरल, भोली, सुंदर AI इंज...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!" "रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...
अस्पताल के उस वीरान कमरे में चारों ओर सफेद दीवारों का सन्नाटा पसरा हुआ था। केवल मशीनों की 'बीप-बीप' की आवाज़ उस सन्नाटे को चीर रही थी। रिया ने बहुत धीरे से अपनी पलकें झपकाई...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
मित्रों ! प्रणाम जीवन की गति बहुत अदभुत है | कोई नहीं जानता कब? कहाँ?क्यों? हमारा जीवन अचानक ही बदल जाता है ,कुछ खो जाता है ,कुछ तिरोहित हो जाता है |हम एक आशा की प्रतीक्षा में खड़े...
आधी रात का समय था, पर शहर कभी सोता नहीं था। एम्स के तेरहवीं मंजिल के ऑपरेशन थियेटर की चमचमाती लाइटें अब धुंधली पड़ने लगी थीं। डॉ. आर्यन वर्मा ने अपने हाथों के लेटेक्स दस्ताने उतारक...
नष्ट होती पृथ्वी और जीवन के लिए संघर्ष करती मानव जाति। यह एक काल्पनिक कहानी है, जिसे मैंने बहुत सोच समझ कर लिखा है। लेकिन अगर समय रहते, प्रकृति को नहीं बचाया गया। तो भविष्य में...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
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