त॓री याद साथ है। Atulya द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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त॓री याद साथ है।

त॓री याद साथ है।

3 4 दीन की छुट्टी थी और काफि महीनो से घर नही गया था तो सोचा घर हो आऊ । कल रात को ही प्लान बना घर जाने का इसलि रेलवे का टिकट कनफमॅ नही मीला, अब जनरल क्लास मे ही ट्रावेल करना पडेगा । मुंबई सेनटलॅ से सुबह 7 बजे की ट्रेन है, मै सुबह 6 बजे ही स्टेशन पहोच गया ।ट्रेन प्लेटफमॅ पर 30

मिनट पहेले ही आ जाती है । प्लेटफमॅ पर ट्रेन आते ही मै जनरल डिब्बे मे चड गया, साईड विन्डो वाली क सीट पर मैने तशरीफ रक्खी और सामने की सीट पर अपना लेपटाप वाला बेग रक्खा । क्युकी ट्रेन 30 मिनट पहेले आगई थी, लोग अभी कम ही थे ट्रेन मे चडने के लि, और हर कोई अपने लि सीट ढूंढ रहा था ।

अपनी सीट पर बैठकर मैने केशव पंडिट का उपन्यास निकाला और पढने लगा, सामने की सीट पर मेरा बेग आराम फरमा रहा था । बहोत से लोग आते और वहां से बेग हटाने को केहते, पर पता नही क्यों मुझे अपने बेग को डिस्टबॅ करना अच्छा नही लगता ईसलि सबको यह केहके भगा देता कि दुसरा पेसेन्झर ऊस सीट पर आ रहा है । यूंही 20 मिनट बीत गये । अब डिब्बे मे काफी लोग चढ चुके थे । मेरी राइट साइड वाली सीट पर 3 4 नौजवान लडके बैठे थे तभी मेरी नझर डिब्बे मे चढ रही एक लडकी पर पडी ।

दीखने मे सीधी-सादी, कोलेज बेग टंगा हुआ और उमर 21 से 25 के बीच की होगी । वह भी अपने लि सीट तलाश कर रही थी । मेरी तरफ आते आते उसने देखा की मेरी राइट साइड काफी सीट्स खाली है और उसने वहा तशरीफ रक्खी । मै फीर से अपनी किताब मे मशगुल हो गया, मेरा बेग अब भी मेरे सामने आराम कर रहा था, तभी गाडी की व्हीशल सुनाई दी, मै समझ गया की अब गाडी चलने वाली है । मुझे लगा अब बेग वहा से हटा लेना चाही पर वह सीट मै किसे आफर करू ?

क्यूकि मै अकेला ट्रावेल कर रहा था, सामने की सीट पर अगर बोरींग सा पेसेंजर आ गया तो मै बोर हो जाऊगा । यह सोच के की कोई अच्छा मील जा, मै अपने आसपास देखने लगा, तभी मेरा ध्यान ऊस लडकी पर पडा । 5 6 लडको के बिच वह अकेली लडकी बैठी थी । मुझे लगा वह अन्कफॅटेबल फिल कर रही होगी ईसलिए मैने अपनी आंखो से उसे मेरे सामने वाली सिंगल विन्डो सीट आफर की । मेरा ईरादा तो पाक ही था पर पता नही ऊस लडकी ने क्या सोचा होगा की ऊसने भी ईशारे से मेरा आफर ठुकरा दीया । मुझे जैसे कोई फकॅ ना पडा हो ऐसे भाव से जैसे ही मैने अपना बेग वहा से हटाया की वह लडकी बिजली की तेझीसी आकर उस सीट पर बैठ गई ।

सीट पर बैठटे ही उसने मुझे देखा, मैने ऊसे देखा, दोनो की नजरे टकराइ फीर नैन –मटक्का हुआ और दोनो के होठो से हल्की सी मुस्कान छुटी ।

मै मन ही मन खुश हुवा की अब मुझे बोर नही लगेगा, और फीरसे अपनी किताब मे खो गया । ट्रेन अब स्टेशन के बाहर निकल चुकी थी, खिडकी से गुजरकर चेहरे पर पडती सुरज की किरणे बयाँ कर रही थी कि दिन नीकल चुका है । क्युकी ट्रेन तेजी से चलने लगी थी मेरी आंखे किताब से हट कर सामने की ओर स्थिर हुई, और मैने देखा की वह लडकी भी मुझे ही देख रही थी । मेरी नझरे जैसे ही ऊसपर पडी वह शर्मा गई और अपनी आंखे मुजसे हटा कर खिडकी के बाहर गडा लि ।

अबतक तो मेरे लिए सब नामॅल था, क्युकि बडे-बडे चश्मे पहने, बालो मे तेल का डिब्बा डाले बालो को रोलर से बैठाए हुए और एकदम फुद्दु दिखने वाले लडके को ऐसी परिस्थिती मे ज्यादा सोचना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है । मैने फीर से अपनी किताब पढना चाही पर इसबार मेरी आंखे कही ओर खिंची जा रही थी । सुबह की सुनहरी महक और सामने वाली सीट पर एक चाँद सा टुकडा बैठा हो तो अक्सर आंखे उस ओर ले ही जाती है । मै अपनी तिरछी निगाहो से उसे देख रहा था,

हवा मे लहराते उसके बाल

सुबह की रोशनी मे सोने से चमकते उसके गाल

ऊन्न गालो पर अभी अभी ऊभरे उसके पिमपल्स

और जब स्माइल करे तो

गालो को चिरते उसके डिंपल्स ।

अगर ऐसा नझारा देखके किसी लडके का दिल ना आए उस लडकी पर, तो लालत है उस लडके की मर्दानी पर ।

वैसे तो मेरा इरादा पाक था पर जब मैने देखा कि वह लडकी भी तिर्छी निगाहो से मुझे देख रही थी तो मुझसे रहा न गया । मैने हलकी सी स्माइल की, सामने से हलकी सी स्माइल मीली । अब मेरे मुँहमे लड्डु फुटने लगे, सोचा उससे कुछ बात करु पर शुरुआत कहां से करु समझ नही आ रहा था ।

मुझ जैसे लडके को एक डर हमेशा रहता है बल्की यूं कहे की हर लडके को डर रहता है कि अगर लडकी से कुछ बात करने गया और लडकी चिल्ला के कुछ बोल भी दी तो अपनी इज्जत सरे बाजार निलाम हो जाएगी । और इंडिया के किसी भी कोने मे चले जाव, आप यह झरुर महसुस करोगे की जब भी पबलीक प्लेस पर लडके लडकी की बहस होती है तो लडकी का साथ देने के लिए साली(बीवी की बहेन) के जिजे बनकर बहोत से लोग खडे हो जाते है ।

ट्रेन मे मुझे भी यही डर सता रहा था की आखिर लडकी से बात करु तो कैसे । बहुत ही हिम्मत जुटा के मेरे मुह से सिफॅ यही निकला “स्टुडंट” ? उसने फीर से स्माइल दी और उसकी शुरीली आवाज मुझे सुनाते हुवे बोली “येस”।अब मुझमे थोडी सी हिम्मत आइ मै कुछ और पुछने ही जा रहा था की चाईवाला आ गया । मैने सोचा कोफी ना सही चलती ट्रेन मे चाय तो ओफर कर ही सकता हुँ । और मैने अपने लिए एक चाय ओडॅर की और उस लडकी को इशारे मे चाय ओफर की । इसबार फीर से शुरीली आवाज सनने को मिली, शब्द थे : नो थेंक्स ।

मैने चाय पीते हुए किताब पढनी चाही पर दिमाग और दिल दोनो एक ही झिद पे अडे थे की उस लडकी से ज्यादा बातें करु, पर प्रेजेन्स आफ माइन्ड केह रहा था की : नही इतनी ज्यादा बात करेगा तो लडकी समझेगी फ्लटॅ कर रहा है । कीसी तरह अपने दिल और दिमाग को कंट्रोल कीया पर नझरे तो धोखा देने पर ऊतारु थी, बार बार तिर्छी गली से उस लडकी को देख ही लेती, और मुझे संकेत देती की वह भी कीसी असमंजस मे है । लगता था उसे भी मुझसे कुछ बात करनी थी पर कैसे करे सम नही आ रहा था । अब मेरी निगाहे किताब से हट के उसे देख रही थी और उसकी निगाहे खिडकी से बाहर का नजारा ना देखकर मुझ पर टिकी हुई थी । दोनो बार बार एकदुसरे को बस स्माइल देते और मारे शरम के नीचे देख लेते । यह सिलसीला कुछ समय तक चला फिर उसने ही होठो के बंधन तोडे और पुछ लिया :You also student ? मैने कहा : no, I am a writer .

वह : ohhh great !

अब लगता था बातो का दौर शुरु होगा । कुछ देर तक खामोशी के बादल छाये रहे और फीर बातो की बारीश हुई ।

मै : Going college?

वह : No, going home.

अगर मै चाहता तो हिन्दी मे भी बात कर सकता था, पर आज कल पता नही सबको क्या हो गया है, अगर अंग्रेजी मे बात ना करो तो लोग अनपढ गवार समझने लगते है । मैने ऐसा नही होने दीया और अंग्रेजी मे ही अपनी बात झारी रखी ।

उसका जवाब सुनकर मुझे थोडा आश्चयॅ हुवा की रात को कौन सी कोलेज ?

और मैने पूछ भी लिया : night college ?

वह हंस पडी : no. I am staying in hostel . 2 days holiday so going home to meet my parents .

मै : ohh great, which college ?

वह : kirti college, 2nd year .

इतनी सारी बाते हो रही थी पर अभी तक ना उसने मेरा नाम पूछा ना मैने उसका । पता नही पर मुझमे नाम पूछने की हिम्मत ही नही हुइ । मेरे पास्ट एक्सपिरियन्स बताते है की जब कभी मैने लडकी से नाम पूछना चाहा तो वह यही समझ बैठी की मै लाइन मार रहा हु । इसलिए इस बार मैने डिफेन्सिव खेलना पसंद किया क्युकि मै जल्दी आउट नही होना चाहता था । सफर 15 घंटे लंबा था इसलिए संभल कर खेलना जरुरी था वरना पुरे प्ले के दौरान पवेलीयन मे बैठना प सकता था ।

बातो को जारी रखते हुए मैने पूछा : where do your mom dad stay ?

उसका जवाब सुनके मेरा दिल बैठ गया ।

वह बोली : भिवंडी

मै समझ गया की हम दोनो का साथ बस कुछ ही देर तक है । फिरभी मैने उस बाकी बचे समय का जीतना हो सके लाभ लेने की कोशिश की ।

उसने भी मुझसे पूछ लिया: and you ?

मै: I stay in Gujarat. Going to meet my family.

उसने बस हलकी सी स्माइल दी ।

आगे बात करने ही वाला था की लडकी उठ के चलने लगी, मै घबराया, सोचा कही नाराज तो नही हो गई मुझसे ?क्युकी अबतक मेरा डर गायब हो चुका था तो मैने पूछ ही लिया : what happened ?

वह हलकी सी शरमा गई समझ गई होगी की मै कुछ देर और उसके साथ रेहना चाहता था । स्माइल करके बोली : next is my stop.

मै थोडा उदास होकर सिफॅ यही बोल पाया : ohh

वह दरवाजे की तरफ चली गई । मै उदास चेहरे से खिडकी से बाहर देखने लगा । पर मेरी नजर अब भी उसे देखना चाहती थी इसलिए मै अपनी राइट साइड थोडा सा झुका और दरवाजे की र देखा, वह लडकी अब भी मुझे देख रही थी । दोनो की नजरे फिरसे मिली और फिर से प्यारी सी मुस्कान की लेन देन हुई । मन नही कर रहा था उससे नजरे हटाने को पर फीर भी हटा ली ।तब तक ट्रेन रूकी, उसका स्टेशन आ चुका था, मैने फिर से उसे देखा, उसके आगे 3 4 लोग थे वह उतर रहे थे, उसने भी मुझे देखा, हलकी सी स्माइल दी और अपने हाथ हिलाकर मुझे बाय-बाय कीया । मैने फीर से स्माइल देकर उसे बाय कीया ।

फीर से उदास चेहरा लेकर मै खिडकी से बाहर देखने लगा, पर मेरी आंखे अब भी उसे देखना चाहती थी । जो लोग उतर रहे थे वह आगे की ओर चल रहे थे, खिडकी से मुझे दिखाइ नही दे रहा था की वह लडकी गयी या नही । मै थोडा सा खिडकी से चीपक के देखने लगा की शायद वह लडकी आखरी बार दीख जाए, मेरी तरह शायद वह भी मुझे देखना चाहती थी इसलिए वह उतर कर पिछे की ओर चली । खिडकी से हम दोनो ने एक दुसरे को देखा, इसबार उसने शमिॅली स्माइल दी और मुझ पर नजरे गडा डी, गाडी चलने लगी पर मै अबभी उसे देख रहा था वह भी मुझे देख रही थी, वह मुझे हाथ हीला कर और स्माइल देकर बाय कहती रही और मै जैसे सलाखों मे कैद हो गया हुं ऐसे खिडकी की सलाखें कस के पकड के उसे देखता रह गया, सोच रहा था की काश मै यह सलाखें तोड के उसके पास जाऊं और वही रूक जाऊं ।

आज भी जब अकेला ट्रावेल करता हुं तो सामने की खाली सीट देखकर उसी की याद आती है, काश कही से आकर वह मेरे सामने बैठ जाए तो मै उसे पकड के अपने पास रख लू । अब अफसोस हो रहा है की उससे ईतनी सारी बातें की पर ना उसका नाम पूछा ना नंबर लिया । बस उस पल की सुनहरी यादे रेह गयी । यदि वह मुझसे मिलती है,तो मै उसे बताना चाहुगा की आज भी “तेरी याद साथ है ”

***