रघुनाथ जी की हवेलीनुमा पुरानी हवेली की दीवारें अब सिर्फ ख़ामोशी की गवाही देती थीं। ढलती शाम के साथ जब गाँव की गलियों में चिड़ियों का शोर थमता, तब रघुनाथ जी के घर में पसरा सन्नाटा और गहरा हो जाता। दो विशाल कमरे, एक ढलवां छत वाला पुराना वेरांडा और दीवारों पर टंगी कुछ पुरानी तस्वीरें—यही उनकी कुल दुनिया बन चुकी थी।

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रोशनी की दस्तक - 1

भाग 1: अनदेखा दीयारघुनाथ जी की हवेलीनुमा पुरानी हवेली की दीवारें अब सिर्फ ख़ामोशी की गवाही देती थीं। ढलती के साथ जब गाँव की गलियों में चिड़ियों का शोर थमता, तब रघुनाथ जी के घर में पसरा सन्नाटा और गहरा हो जाता। दो विशाल कमरे, एक ढलवां छत वाला पुराना वेरांडा और दीवारों पर टंगी कुछ पुरानी तस्वीरें—यही उनकी कुल दुनिया बन चुकी थी। तस्वीरों में मुस्कुराते चेहरे उनके दोनों बेटों के थे, जो सालों पहले शहर जाकर बड़े साहब बन चुके थे। अब तो वे विदेशी उड़ानों और ऊंचे ओहदों में इतने व्यस्त थे कि रघुनाथ जी का ...और पढ़े

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रोशनी की दस्तक - 2

भाग 2: नीम के पेड़ की छाँवरघुनाथ जी ने उस शाम सोनू को न केवल गणित का वह कठिन समझाया, बल्कि उसे यह भी सिखाया कि किसी भी समस्या से डरने की जगह उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर हल करना चाहिए। सोनू उस रात बहुत खुशी-खुशी अपने घर गया। अगले दिन जब गणित की परीक्षा हुई, तो सोनू ने सारे सवाल बिना किसी हिचकिचाहट के हल कर दिए। जब दो दिन बाद परिणाम आया, तो सोनू को कक्षा में सबसे ज्यादा अंक मिले थे।पूरे स्कूल में सोनू की तारीफ होने लगी। जब उसके दोस्तों ने पूछा कि उसने इतनी ...और पढ़े

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रोशनी की दस्तक - 3

भाग 3: सच्चा ज्ञान और असली धनसोनू के पिता की बात सुनकर चौपाल पर गहरा सन्नाटा छा गया। रघुनाथ ने अपनी आँखें नीची कर लीं और कांपती हुई आवाज़ में बोले, "अगर आप लोगों को लगता है कि मेरे बच्चों को पढ़ाने से कोई गलती हुई है, तो मैं... मैं आगे से बच्चों को यहाँ नहीं बुलाऊँगा। मेरा मकसद सिर्फ इन बच्चों का भला करना था।"तभी सरपंच आगे बढ़े और उन्होंने रघुनाथ जी के दोनों कांपते हुए हाथों को अपने हाथों में थाम लिया। सरपंच की आँखों में नमी थी। वे मुस्कुराते हुए बोले, "अरे रघुनाथ जी! आप क्या ...और पढ़े

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