हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक आवाज़  "मुझे क्यों मारा?" ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने सब बदल दिया, और फिर वो आवाज़ कभी नहीं आई।ये बात है एक लड़के की, जो अपनी ज़िंदगी से हार चुका था। उसके पास ना तो जीने की कोई वजह थी और ना ही चाहत। वो जो भी करना चाहता, सब में असफल हो जाता। पर एक दिन उसने अपनी हताश ज़िंदगी को खत्म करने का सोचा।

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कॉल - 1

हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक मुझे क्यों मारा? ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने सब बदल दिया, और फिर वो आवाज़ कभी नहीं आई।ये बात है एक लड़के की, जो अपनी ज़िंदगी से हार चुका था। उसके पास ना तो जीने की कोई वजह थी और ना ही चाहत। वो जो भी करना चाहता, सब में असफल हो जाता। पर एक दिन उसने अपनी हताश ज़िंदगी को खत्म करने का सोचा। वो अपने घर पहुँचा और खुद ...और पढ़े

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कॉल - 2

हर सुबह एक नई शुरुआत लेकर आती है, लेकिन आर्य की ज़िंदगी में ऐसा नहीं था। जब उसकी आँख तब तक सुबह हो चुकी थी, लेकिन उसका कमरा अभी भी अंधेरे से ढका हुआ था। शायद इसलिए क्योंकि उसके कमरे में आने वाली रोशनी को पर्दों ने रोका हुआ था, या फिर उसके मन की तन्हाई ने उसके आस-पास भी अंधेरे में अपना घर ढूंढ लिया था, जिसमें उम्मीद की कोई किरण नज़र नहीं आती।आर्य उठता है और अपने टेबल के पास पड़े फोन को उठाता है। वो जैसे ही फोन खोलता है, उसमें आज कोई भी कॉल या ...और पढ़े

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कॉल - 3

आर्य अंदर आता है और कमरे को ध्यान से देखने लगता है। उसे सब कुछ बिल्कुल सामान्य लगता है। मान लेता है कि यह सब सिर्फ एक सपना था। वह जैसे ही बिस्तर पर लेटने वाला होता है, तभी उसका फोन बज उठता है। आर्य डर जाता है, क्योंकि उसने सच में रिचार्ज नहीं कराया था। वह डरते हुए फोन उठाता है और देखता है कि कॉल उसी अनजान नंबर से थी।वह घड़ी की ओर देखता है। ठीक रात के 12 बज रहे थे।आर्य डरते हुए धीमी आवाज़ में कहता है, "हैलो... कौन है?"दूसरी तरफ़ से कोई आवाज़ नहीं ...और पढ़े

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कॉल - 4

तब उसे कुछ याद आता है और उठकर अपने आस-पास देखता है। उसे याद आता है कि जब वह से गया था तो घर पूरी तरह फैला हुआ था, लेकिन अब सब अपनी जगह पर वैसे ही रखा था। लेकिन यह सब सोचना भी उसके लिए भारी लग रहा था। आर्य बिस्तर पर वापस लेट जाता है और गहरी नींद में सो जाता है।उसकी नींद कॉल की आवाज़ से टूटती है। आर्य को लगता है वह सपना देख रहा है, लेकिन कॉल की आवाज़ इतनी तेज़ होती है कि उसे समझ ही नहीं आता। तभी उसकी आँख खुलती है। ...और पढ़े

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कॉल - 5

Aap sab review nahi likhte hai ‍↕️ kripya apne vichar zarur btaye ki aapko meri kahani kesi lagri hai..aur ke liye jude rahe ️अब आगे!!!आर्या को पूरी रात नींद नहीं आती। वह करवटें बदलता रहता है। वह इतना बेचैन हो जाता है कि उसे समझ ही नहीं आ रहा था क्या सपना है और क्या हकीकत। उसे पता ही नहीं चलता कब सुबह हो जाती है।ये सुबह हर दिन की तरह नहीं थी। वह उठता है और सबसे पहले उसकी नज़र शीशे पर जाती है। वो देखता है अब वो लाल निशान वहाँ नहीं था और ना ही वो ...और पढ़े

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