Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे। अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया। "उफ़्फ... बंद हो जा यार..." लेकिन अलार्म लगातार बजता रहा। आख़िरकार उसने झुंझलाकर बिस्तर के पास रखे मोबाइल की तरफ़ हाथ बढ़ाया। आधी बंद आँखों से स्क्रीन पर उँगली फेरी और अलार्म बंद कर दिया। मोबाइल की स्क्रीन पर समय चमक रहा था—
Raaz - Part 1
Chapter 1दिल्ली। सुबह के सात बजे।अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।बिस्तर पर चादर में लिपटी शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।"उफ़्फ... बंद हो जा यार..."लेकिन अलार्म लगातार बजता रहा।आख़िरकार उसने झुंझलाकर बिस्तर के पास रखे मोबाइल की तरफ़ हाथ बढ़ाया। आधी बंद आँखों से स्क्रीन पर उँगली फेरी और अलार्म बंद कर दिया।मोबाइल की स्क्रीन पर समय चमक रहा था—07:00 AMउसने मोबाइल वापस तकिए के पास रख दिया और लंबी साँस लेकर फिर से आँखें बंद कर लीं।"बस... पाँच मिनट और..."यह उसका रोज़ का बहाना था।लेकिन आज किस्मत उसके पक्ष ...और पढ़े
Raaz - Part 2
सुबह लगभग छह बजे अलार्म बजा तो अवंतिका ने धीरे-धीरे आँखें खोलीं।रात भर उसे ठीक से नींद नहीं आई आँख बंद करते ही वही सफ़ेद कपड़ों वाली औरत सामने आ जाती। कभी सड़क की लाइट के नीचे खड़ी दिखाई देती, तो कभी काली कोठी की खिड़की में।कुछ पल तक वह चुपचाप छत को देखती रही। फिर तकिए के पास रखा मोबाइल उठाया और सबसे पहले वही तस्वीर खोली।काली कोठी...उसने तस्वीर को ज़ूम करके खिड़की वाला हिस्सा देखा।इस बार वहाँ कुछ भी साफ़ नज़र नहीं आ रहा था। बस धुंधली-सी दीवार और पुरानी तस्वीर का धुंधलापन।अवंतिका हल्का-सा मुस्कुराई।"लगता है सच ...और पढ़े
Raaz - Part 3
सुबह के सात बज रहे थे।चंदनगढ़ की सुबह दिल्ली जैसी नहीं थी।दिल्ली की सुबह शोर के साथ जागती है, यहाँ सुबह बिना किसी आवाज़ के उतरती थी। इतनी खामोशी थी कि लगता था जैसे पूरा कस्बा अब भी नींद में हो।अवंतिका की आँख खुली तो कमरे में हल्की-सी धूप परदों से छनकर अंदर आ रही थी।वह धीरे से उठकर बैठ गई।अचानक उसे रात की वह आवाज़ याद आई..."अवंतिका..."उसने सिर झटक दिया।"शायद सपना था..." उसने खुद से कहा।लेकिन एक चीज़ सपना नहीं थी।वह मैसेज।उसने तुरंत अपना फोन उठाया और स्क्रीन ऑन की।मैसेज अब भी वहीं था।"काली कोठी में मत आना।"अवंतिका ...और पढ़े