मंदिर में तुम

(10)
  • 0
  • 0
  • 7.8k

सुबह का समय था…हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी…मंदिर की घंटियों की मधुर आवाज़ पूरे माहौल को पवित्र बना रही थी…राधा-कृष्ण के मंदिर में आज कुछ खास शांति थी…उसी मंदिर के दरवाज़े पर एक लड़की धीरे-धीरे कदम रखते हुए अंदर आई—सुनामी सिंह…सफेद सूट में, लंबे खुले बाल, आँखों में हल्की झिझक… क्योंकि वो इस शहर में नई थी।उसने चारों तरफ देखा…सब कुछ अनजान था, पर मंदिर में एक अजीब सा अपनापन था।वो आगे बढ़ी…हाथ जोड़कर राधा-कृष्ण के सामने खड़ी हो गई…

Full Novel

1

मंदिर में तुम - 1

सुबह का समय था…हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी…मंदिर की घंटियों की मधुर आवाज़ पूरे माहौल को पवित्र बना थी…राधा-कृष्ण के मंदिर में आज कुछ खास शांति थी…उसी मंदिर के दरवाज़े पर एक लड़की धीरे-धीरे कदम रखते हुए अंदर आई—सुनामी सिंह…सफेद सूट में, लंबे खुले बाल, आँखों में हल्की झिझक… क्योंकि वो इस शहर में नई थी।उसने चारों तरफ देखा…सब कुछ अनजान था, पर मंदिर में एक अजीब सा अपनापन था।वो आगे बढ़ी…हाथ जोड़कर राधा-कृष्ण के सामने खड़ी हो गई…धीरे-धीरे उसने अपनी आँखें बंद कर लीं…उसी समय…मंदिर के दूसरे कोने से एक लड़का अंदर आया—कृतिक ठाकुर…शांत स्वभाव, चेहरे पर ...और पढ़े

2

मंदिर में तुम - 2

अब ये रोज़ का सिलसिला बन गया था…सुबह की वो पवित्र घड़ी…मंदिर की वही सीढ़ियाँ…और सुनामी और कृतिक का मिलना…कभी भगवान के सामने खड़े होकर…तो कभी मंदिर के पीछे वाले शांत कोने में बैठकर…दोनों बातें करते…वो जगह अब उनकी छोटी-सी दुनिया बन चुकी थी…।Title song आया -मंदिर की सीढ़ियों पे पहली मुलाकात थी,तेरी आँखों में जैसे कोई खास बात थी…हाथ में प्रसाद, दिल में ख्वाब लिए,तू सामने आई तो रुक गई हर घड़ी…घंटी की आवाज़ में, तेरा नाम सुनाई दिया,रब के दर पे ही मुझे, मेरा प्यार मिल गया…एक दिन…मंदिर के पीछे पुराने पीपल के पेड़ के नीचे… दोनों ...और पढ़े

3

मंदिर में तुम - 3

सुबह का वही मंदिर…वही सीढ़ियाँ… वही घंटियों की आवाज़…पर आज…कृतिक के चेहरे पर कुछ अलग था…सुनामी पहले से वहाँ थी…जैसे उसे उसका इंतज़ार हो…जैसे ही कृतिक आया…उसने मुस्कुराने की कोशिश की…पर आज उसकी मुस्कान… अधूरी थी…दोनों मंदिर के पीछे उसी पीपल के पेड़ के पास बैठ गए… कुछ पल…कोई कुछ नहीं बोला…फिर…कृतिक (धीरे, गंभीर आवाज़ में) बोला -मुझे… कुछ महीनों के लिए मुंबई जाना पड़ रहा है…सुनामी का दिल जैसे एकदम रुक गया…सुनामी (धीरे से) बोली -मुंबई…? क्यों…?कृतिक बोला -एक case है…थोड़ा बड़ा… और risky भी…उसकी आँखों में वही निडरता थी…पर इस बार… उसके पीछे छुपा खतरा भी साफ ...और पढ़े

4

मंदिर में तुम - 4

अब इंतज़ार… डर में बदल चुका था…कई दिन बीत गए…ना कोई कॉल… ना कोई मैसेज…सुनामी टूटने लगी थी…एक रात…उसने फैसला लिया…वो बोली -मैं खुद जाऊँगी… मुंबई…उसके दिल में डर था…पर उससे कहीं ज्यादा…कृतिक को खो देने का खौफ…।अगले ही दिन…वो मुंबई के लिए निकल गई, भीड़… शोर… भागती हुई ज़िंदगी…सब कुछ नया था उसके लिए…पर उसकी आँखें सिर्फ एक ही चेहरा ढूंढ रही थीं—कृतिक…काफी पूछताछ के बाद…उसे वो गेस्ट हाउस मिल गया…जहाँ कृतिक ठहरा था…उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था…वो धीरे-धीरे अंदर गई…रिसेप्शन पर जाकर नाम बताया…।वो बोली -कृतिक ठाकुर…रिसेप्शनिस्ट ने उसे देखा…थोड़ा सोचा…फिर बोला—वो कई दिनों से ...और पढ़े

5

मंदिर में तुम - 5

रात गहरा चुकी थी… मुंबई की भागती हुई एमएम धीरे-धीरे पीछे छूट रही थी…कृतिक और सुनामी…दोनों स्टेशन पर खड़े लौटने का वक्त था…अपनी पुरानी जगह… नोएडा…और… अपने मंदिर के पास…ट्रेन आ चुकी थी… दोनों चुपचाप अपनी सीट पर बैठ गए…कुछ पल…बस खिड़की के बाहर देखते रहे…फिर…ट्रेन चल पड़ी, हल्का-सा झटका लगा…और उसी के साथ…जैसे उनकी ज़िंदगी भी एक नए सफर पर निकल पड़ी…सुनामी ने धीरे से अपनी कलाई उठाई…कश्मीरी चूड़ियाँ…हल्की-हल्की खनक रही थीं… कृतिक की नजर उन पर पड़ी…वो हल्का सा मुस्कुरा दिया…।कृतिक (धीरे से)। बोला -अच्छी लग रही हैं…सुनामी (शरमाते हुए) बोली -किस पर…?कृतिक (नज़रें उसी ...और पढ़े

6

मंदिर में तुम - 6

सुबह का समय था…पर आज… सूरज की रोशनी भी फीकी लग रही थी…एयरपोर्ट…लोग आ-जा रहे थे…किसी के लिए शुरुआत…किसी लिए जुदाई…।और आज…सुनामी और कृतिक…दोनों उसी भीड़ में खड़े थे…पर उनके लिए…दुनिया थम सी गई थी…सुनामी की आँखें नम थीं…हाथ में टिकट…दिल में हजारों सवाल…कृतिक उसे बस देख रहा था…जैसे हर पल… उसे याद कर लेना चाहता हो…कुछ देर…दोनों चुप रहे…फिर…सुनामी (धीरे, कांपती आवाज़ में) बोली -Time हो गया है…कृतिक ने हल्का सा सिर हिलाया…पर… उसके पैर जैसे वहीं जमे थे…सुनामी (आँखों में आँसू लिए) बोली -कुछ बोलोगे नहीं…?कृतिक ने गहरी सांस ली…कृतिक (धीरे से) बोला -बस… इतना कि…अपना ख्याल ...और पढ़े

7

मंदिर में तुम - 7

रात का समय था…कोरिया में लाइट्स चमक रही थीं…और सुनामी अपने केबिन में अकेली बैठी थी…आज उसका मन बहुत था…उसने तुरंत फोन उठाया…और…कृतिक को वीडियो कॉल कर दिया… कुछ सेकंड…फिर स्क्रीन पर वही चेहरा आया…कृतिक… ️ थोड़ा थका हुआ… पर वही सुकून देने वाली मुस्कान…।कृतिक (हल्की मुस्कान के साथ) बोला -अरे… इंजीनियर साहिबा…आज तो बड़े दिनों बाद वीडियो कॉल… सुनामी की आँखें चमक उठीं…वो बोली -आज आपको कुछ दिखाना है…!कृतिक बोला -अच्छा…? दिखाइए…सुनामी तुरंत खड़ी हो गई…वो फोन लेकर पूरे ऑफिस में घूमने लगी—ये मेरा केबिन…ये मीटिंग रूम…ये balcony… यहाँ से पूरा शहर दिखता है…उसकी आवाज़ में बचपन ...और पढ़े

8

मंदिर में तुम - 8

रात बीत चुकी थी…पर Si-woo के लिए…वो रात खत्म ही नहीं हो रही थी…अपने अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ा…वो की लाइट्स देख रहा था…पर उसकी आँखों में…बस एक ही चेहरा सुनामी… ️ उसने हल्की-सी हँसी छोड़ी…वो बोला -First time… I liked someone…उसकी आवाज़ में खुद से ही सवाल था…वो बोला -And she said no…वो अंदर आया…सोफे पर बैठ गया…उसके दिमाग में बार-बार वही पल घूम रहा था—I love her……I love someone else…उसने आँखें बंद कर लीं…थोड़ा दर्द था…पर गुस्सा नहीं…क्योंकि वो जानता था सुनामी गलत नहीं थी…वो तो पहले से ही किसी की थी… ️ Si-woo को हमेशा से ...और पढ़े

9

मंदिर में तुम - 9

ठंडी हवा चल रही थी…कोरिया की सड़कों पर हल्की रोशनी थी…और सुनामी और कृतिक साथ-साथ चल रहे थे…कुछ देर खामोशी के बाद…सुनामी (धीरे से, पर यकीन के साथ) बोली -हम… इंडिया पहुँचकर शादी कर लेंगे… ️कृतिक रुक गया…उसने उसकी तरफ देखा…वो बोला -इतना आसान लगता है आपको…?सुनामी मुस्कुराई…वो बोली -हाँ…कृतिक ने भौंहें हल्की चढ़ाईं और बोला—आपके घर वाले… मान जाएंगे…?सुनामी ने बिना रुके जवाब दिया—क्यों नहीं मानेंगे…?फिर वो थोड़ा उसके करीब आई…वो बोली -उन्हें बस कुछ चीज़ें चाहिए…कृतिक ध्यान से सुन रहा था…वो बोली -लड़का अच्छा हो…कमाता हो...उनकी बेटी को खुश रखे…कृतिक हल्का सा मुस्कुराया और बोला—और…?सुनामी ने उसकी ...और पढ़े

10

मंदिर में तुम - 10

कुछ दिनों बाद…सब कुछ शांत हो चुका था…खतरा खत्म…डर खत्म…अब…सिर्फ एक मंज़िल थी इंडिया… ️️ फ्लाइट में…सुनामी खिड़की के बैठी थी…बादलों को देखते हुए…उसके चेहरे पर सुकून था…उसने धीरे से कृतिक का हाथ पकड़ लिया और बोली—अब सब ठीक हो जाएगा ना…?कृतिक ने उसकी तरफ देखा…वो बोला -जब तक मैं हूँ…कुछ गलत नहीं होगा… ️सुनामी मुस्कुरा दी…इंडिया… नोएडा...वही शहर…वही सड़कें…वही मंदिर… जहाँ से सब शुरू हुआ था…दोनों सबसे पहले वहीं गए…राधा-कृष्ण के मंदिर में…दोनों साथ खड़े थे…आँखें बंद…जैसे पहली बार…घंटी बजी… और…फूल फिर से गिरा… दोनों ने एक साथ आँखें खोलीं…और इस बार…कोई झिझक नहीं थी…बस…प्यार था… ...और पढ़े

अन्य रसप्रद विकल्प