गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा करके मैं आराम करता था। ऐसे ही दिन गुजर रहे थे,,,,, एक रात मैं शौच के लिए निकला।दिन भर बाहर मटकते रहने के कारण मुझे किसी चीज‌ का डर नहीं था। गांव वाले जिस मशान की ओर शाम के बाद अक्सर जाने झिझकते थे। मैं बड़ी आसानी से उस मशान मे रात को भी चला जाता था।

Full Novel

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परेतनी की शादी - 1

गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा करके मैं आराम करता था। ऐसे ही दिन गुजर रहे थे,,,,,एक रात मैं शौच के लिए निकला।दिन भर बाहर मटकते रहने के कारण मुझे किसी चीज‌ का डर नहीं था।गांव वाले जिस मशान की ओर शाम के बाद अक्सर जाने झिझकते थे। मैं बड़ी आसानी से उस मशान मे रात को भी चला जाता था।मशान मे कभी कभी ...और पढ़े

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परेतनी की शादी - 2

मैं खाने के मामले में बड़ा ही शातीर था। जब मै खाना खाने बैठता था तो चार पांच लोगों खाना मै अकेले खा जाता था।इसलिए आमतौर पर लोग मुझे अपने घर खाना खाने पर बुलाने से कतराते थे। मां के गुज़र जाने के बाद मैं काम चलाऊं खाना बनाकर रोज की आदत थी। इसलिए मुझे स्वादिष्ट भोजन बहुत पसंदथा,,,,।और यहां भी मैंने दवा कर रोटियां खाता गया,,, लगभग चालीस रोटियां खाने के बाद मेरा पेट भरा था और फिर मैंने तृप्ति भरी डकार ली।और बाद में वो खाना खाने बैठ गई। मैंने उससे बात करना चाही,,,, लेकिन उसने इशारे ...और पढ़े

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परेतनी की शादी - 3

वे वस्त्र किसी राज महाराज को भी मात करने वाले वस्त्र थे। रेशमी रंग असली सोने की कढ़ाई वालेचमचमाते वस्त्र ! जैसे अभी के अभी सीलकर आए हो। मैंने पहना और बिल्कुल मेरी साईज के थे वे।ऐसा लगा। जैसे नाप लेकर सीले ग‌ए हो।तभी आवाज आई,आओ चले,,,,,,मैंने मुड़कर देखा तो वही सुन्दर युवती ने राजकुमारी के जैसे परिधान पहने खड़ी थी। मैं मंत्रमुग्ध सा उसकी ओर बढ़ा चला। उसने मेरा हाथ पकड़ा और आगे बढ़ गई।वो मुझे एक बड़े से डाइनिंग टेबल पर ले ग‌ई ।उस टेबल पर ढेर सारे पकवान और खाद्य पदार्थों से भरा पड़ा था।मैंने पहली ...और पढ़े

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परेतनी की शादी - 4

मेरे हामी भरने के बाद वह मुझे खाने की मेज पर ले आई,तब तक दोनों अधेड़ व्यक्ति वहां पर सेवा के लिए उपस्थित हो चुके थे।मेरे लिए ये एक बडी अजीब बात थी। क्योंकि वें दोनों अचानक से गायब हो जाते थे और अचानक ही प्रकट हो जाते थे।लेकिन उस वक्त मेरे लिए खाना बहुत मायने रखता था।आप सोच रहे होंगे कि क्या एख भोजन खाना,जीवन में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है ?किसी भूखे से यह सवाल पुछेंगे तो आपको खुद समझ आएगा कि एक भूखे गरीब व्यक्ति के लिए भोजन का क्या महत्व जीवन से भी ज्यादा ...और पढ़े

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परेतनी की शादी - 5

वह सुन्दरी मुझे जगा हुआ देखकर उसने मेरी ओर देखा और मुस्कुराई तब तक वे दोनों अधेड़ प्रकट हो थे एक ने मेरे हाथ धुलवाए और दूसरा जो खड़ा था उसने मुझे तौलीयां दिया हाथ पोंछने के उस सुन्दरी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और राजमहल जैसे भवन में पता नहीं कहां से हल्की-हल्की सफेद रोशनी छाई हुई थी।वह मुझे हाथ पकड़ कर घुमाने ले ग‌ई राजमहल के बाहर एक सुंदर बगीचा था।उस बगीचे के एक किनारे पर एक तलाब बना हुआ था और उस तलाब के बीचोंबीच एक छोटा सा कमरा था।बगीचे के अंदर बहुत सुंदर सुंदर फूल ...और पढ़े

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परेतनी की शादी - 6

मैं धीरे से उठा नदी में स्नान किया और वापस अपने घर की तरफ चल पड़ा,,,,।रास्ते में मुझे गांव क‌ई लोग मिले। लेकिन मैं किसी को छूने की कोशिश करता तो मैं उन्हें स्पर्श नहीं कर पाता था।और गांव के लोगों मेरी ओर देखकर कोई कुछ नहीं बोल भी नहीं रहा था,,,,,,,।ऐसा लग रहा था ऐसा लग रह ऐसा लग रहा था जैसेम उन्हें जैसे मैं उन्हें दिखाई नहीं दे रहा था,,,,,।यह मेरे लिए बड़ी आश्चर्य जनक बात थी,,,,,,।मैंने एक दो मित्रों को छूने की कोशिश की लेकिन उन्हें जैसे कोई आभास नहीं हुआ,,,।इसलिए मैंने उनमें से एक को ...और पढ़े

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