अवनि एक अटूट विश्वास

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कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है। यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि कानपुर की रईसी का सबसे बड़ा प्रतीक है। शहर का बच्चा-बच्चा जानता है कि सेठ श्याम सुंदर गोयंका के पास जितना सोना है, उससे कहीं अधिक उनका सम्मान है। गोयंका ज्वेलर्स का नाम कानपुर ही नहीं, बल्कि लखनऊ और बनारस तक एक भरोसे का नाम है। हवेली के ऊंचे दरवाजों पर आज मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में ताजे गेंदे के फूलों के तोरण सजे हैं। आंगन में तिल और गुड़ की भीनी-भीनी खुशबू तैर रही है। हवेली का हर कोना चहल-पहल से भरा है। चाचा-चाची, ताऊ-ताई और भाई-बहनों की हंसी-ठिठोली से हवेली गूंज रही है।

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अवनि एक अटूट विश्वास - 1

कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है।यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि कानपुर की रईसी का सबसे बड़ा प्रतीक है।शहर का बच्चा-बच्चा जानता है कि सेठ श्याम सुंदर गोयंका के पास जितना सोना है, उससे कहीं अधिक उनका सम्मान है। गोयंका ज्वेलर्स का नाम कानपुर ही नहीं, बल्कि लखनऊ और बनारस तक एक भरोसे का नाम है।हवेली के ऊंचे दरवाजों पर आज मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में ताजे गेंदे के फूलों के तोरण सजे हैं। आंगन में तिल ...और पढ़े

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अवनि एक अटूट विश्वास - 2

आर्यमन, जो अपनी आलीशान दिल्ली की लाइफस्टाइल और बिजनेस मीटिंग्स में व्यस्त रहता था, उसने भी जब अपने माता-पिता चेहरे पर इतनी खुशी देखी, तो वह मना नहीं कर पाया।उसके मन में भी एक जिज्ञासा पैदा हुई कि वह कौन सी लड़की है, जिसने उसके माता-पिता को इतना प्रभावित कर दिया है।अध्याय ५: आर्यमन का अतीत और टूटा हुआ विश्वासदिल्ली का कपूर परिवार जब कानपुर के लिए निकल रहा था, तब गाड़ियों के काफिले में सबसे आगे वाली कार में आर्यमन खामोश बैठा खिड़की से बाहर देख रहा था।ऊपर से शांत दिखने वाले आर्यमन के भीतर यादों का एक ...और पढ़े

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अवनि एक अटूट विश्वास - 3

देख रहे हो आर्यमन, कैसे तुम्हें फंसाने के लिए इन लोगों ने पूरा बाजार सजा रखा है? कितने उतावले ये लोग तुम्हें अपना बनाने के लिए।"अध्याय १०: चाय की चुस्की और कड़वाहट का अहसासड्राइंग रूम में बातों का दौर चल रहा था कि तभी सेठ श्याम सुंदर गोयंका की बुलंद आवाज़ गूंजी।उन्होंने अपनी छोटी बहू (अवनि की चाची) को देखते हुए बड़े लाड़ से कहा, "छोठी बहू! अरे भाई, मेहमान आ गए हैं और हमारी बिटिया अभी तक अंदर ही है? जाओ, अवनि से कहो कि अपने हाथों से अदरक वाली खास चाय बनाकर लाए। मेहमानों का सत्कार घर ...और पढ़े

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अवनि एक अटूट विश्वास - 4

आर्यमन की उलझन और पिघलती बर्फआर्यमन का आंतरिक संघर्षपूरे दिन कानपुर की गलियों में घूमते हुए, आर्यमन की नज़रें पल के लिए भी अवनि से नहीं हटीं। वह अपनी पुरानी यादों के चश्मे से अवनि को देखने की कोशिश कर रहा था।उसके दिमाग में श्रद्धा का चेहरा घूम जाता, जिसने हमेशा खुद को आगे रखा था। लेकिन यहाँ अवनि... वह कुछ अलग ही थी।गंगा घाट पर सादगी: आर्यमन ने देखा कि जब अवनि ने गंगा जल के छींटे अपने माथे पर लगाए, तो उसके चेहरे पर कोई दिखावा नहीं था, बल्कि एक अजीब सा सुकून था।उसे लगा, "क्या कोई ...और पढ़े

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अवनि एक अटूट विश्वास - 5

अवनि ने अपनी चोटिल उंगली पर पट्टी बाँधते हुए कान्हा की मूरत को निहारा। उसकी आँखों में आंसू नहीं, एक गहरा सवाल था।"कान्हा! क्या किसी का दिल इतना पत्थर हो सकता है कि उसे दूसरे का लहू भी दिखावा लगे?या फिर... या फिर उनके साथ कुछ ऐसा हुआ है जिसने उन्हें 'इंसानियत' पर भरोसा करना ही भुला दिया है?"अवनि को याद आया कि कैसे आर्यमन ने मंदिर में उसका हाथ थामा था। उस एक पल के लिए उसकी पकड़ में जो मज़बूती थी, वह किसी को गिराने वाले की नहीं, बल्कि किसी को बिखरने से बचाने वाले की थी।अवनि ...और पढ़े

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अवनि एक अटूट विश्वास - 6

हवेली की सुबह आज कुछ अलग ही रंग लिए हुए थी।सूरज की सुनहरी किरणें जब सफेद संगमरमर के फर्श पड़ रही थीं, तो ऐसा लग रहा था मानो पूरी हवेली किसी उत्सव की तैयारी कर रही हो।अवनि ने सुबह जल्दी उठकर स्नान किया और कान्हा को भोग लगाकर रसोई में जुट गई। उसने बड़े चाव से गरमा-गरम कचौड़ियाँ और केसरिया जलेबियाँ तैयार की थीं।नाश्ते की मेज़ और शाही ठाट-बाटहवेली के डाइनिंग हॉल का दृश्य किसी राजसी दरबार से कम नहीं था। मेज़ पर बिछी रेशमी चादर और उस पर सजे शुद्ध सोने और चांदी के बर्तन अपनी चमक बिखेर ...और पढ़े

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अवनि एक अटूट विश्वास - 7

क्या हुआ अवनि जी? अगर अकेले यह सब करने का साहस नहीं जुटा पा रही हैं, या मेरे साथ में आपको संकोच हो रहा है, तो संकोच छोड़िए।आप अपने उन मित्रों को बुला सकती हैं जिनसे आप रात के सन्नाटे में बात कर रही थीं।हो सकता है आपकी ज़िंदगी में मुझसे पहले भी कुछ 'खास' लोग रहे हों, उन्हें बुला लीजिए! आखिर इस बनावटी सादगी के पीछे की असलियत उन्हें तो पता ही होगी।"अवनि पत्थर की मूरत बनी उसे देख रही थी। उसकी चोटिल उंगली से रिसता खून अब उसकी हथेली को भिगो रहा था, पर उस शारीरिक पीड़ा ...और पढ़े

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अवनि एक अटूट विश्वास - 8

की पकड़ ढीली हो रही थी और पेड़ की जड़ें मिट्टी छोड़ रही थीं। अवनि ने तय कर लिया वह उसे ऐसे मरने नहीं देगी।मौत से मुकाबलाअवनि ने हिम्मत जुटाई और ढलान के रास्ते धीरे-धीरे नीचे उतरने लगी। पत्थरों की रगड से उसके हाथ-पाँव छिल रहे थे, वह फिसल रही थी, पर उसकी नज़र सिर्फ आर्यमन पर थी।फिसलते हुए वह एक ऐसी चट्टान पर पहुँच गई जो आर्यमन के ठीक ऊपर थी। वह उसके बिल्कुल करीब तो नहीं थी, पर इतनी पास थी कि उसकी आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी।"आर्यमन जी, घबराइए मत! मैं आ गई हूँ। मैं ...और पढ़े

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