कुसुम सामने बैठे शीशे में खुद को घूरे जा रही थी। उसने खुद को देखा ! लाल साड़ी, बड़े-बड़े झुमके, माथे पे बिंदी, खुले बाल जो कमर तक थे, हाथों में चूड़ियाँ ! वो खुद को देख ही रही थी जब पीछे से एक तीखी आवाज़ आई ! “ये क्या, तुमने मेकअप क्यों नहीं किया? चेहरा देखो कितना काला लग रहा है। एक तो पहले से ही रंग दबा हुआ है ! और तुम हो कि चेहरे पे कुछ लगाती ही नहीं हो! बस इसलिए कितनी बार रिजेक्ट हो चुकी हो ! सब यही कहते हैं, रंग दबा हुआ है! गर मेरी हेलो असल में बारह बरश का इंतज़ार कहानी एक उपन्यास है इसके और भी पार्ट है मैंने उसको गलती से कहानी शैली में डाल दिया है ! इसलिए अगर आप लोगों को अगला पार्ट पढ़ना है तो आ पढ़ सकते हैं मैं डाल दूंगी ओके !
बारह बरश का इंतज़ार - 1
कुसुम सामने बैठे शीशे में खुद को घूरे जा रही थी। उसने खुद को देखा ! लाल साड़ी, बड़े-बड़े माथे पे बिंदी, खुले बाल जो कमर तक थे, हाथों में चूड़ियाँ ! वो खुद को देख ही रही थी जब पीछे से एक तीखी आवाज़ आई !“ये क्या, तुमने मेकअप क्यों नहीं किया? चेहरा देखो कितना काला लग रहा है। एक तो पहले से ही रंग दबा हुआ है ! और तुम हो कि चेहरे पे कुछ लगाती ही नहीं हो! बस इसलिए कितनी बार रिजेक्ट हो चुकी हो ! सब यही कहते हैं, रंग दबा हुआ है!गर मेरी हेलो असल में बारह बरश का इंतज़ार कहानी एक उपन्यास है इसके और भी पार्ट है मैंने उसको गलती से कहानी शैली में डाल दिया है ! इसलिए अगर आप लोगों को अगला पार्ट पढ़ना है तो आ पढ़ सकते हैं मैं डाल दूंगी ओके ! ...और पढ़े
बारह बरश का इंतज़ार - 2
कमरे में सिर पकड़े बैठी कुसुम के ज़ेहन में ! बारह बरस पहले की यादों ने हल्के से दस्तक !और कुसुम उन्हें आने से रोक नहीं पाई।बचपन मैं जब वो पाँच साल की थी, तब वो इस शहर में अपने माँ-पापा के साथ आई थी।वो कभी भी आसानी से दोस्त नहीं बना पाती थी।यही कारण था कि यहाँ आने के बाद भी दो दिन तक वो अपने घर से बाहर नहीं निकली थी।हमेशा की तरह वो अपने कमरे में बैठी अपनी गुड़िया के बालों को सँवार रही थी,जब एक “ चहकती सी आवाज़ “ उसको सुनाई दी“हैलो! “कुसुम ने ...और पढ़े
बारह बरश का इंतज़ार - 3
अगले दिन उसकी नींद बाहर से आते शोर से खुली।बाहर से हँसने की आवाज़ें आ रही थीं।कुसुम ने अपना पकड़ लिया और उठकर बैठ गई।उसका सिर दर्द कर रहा था ! कल रात वो अंकित के बारे में सोचते-सोचते ही सो गई थी। उसे अपनी माँ की आवाज़ सुनाई दी“अंकित!”कुसुम हड़बड़ा कर उठ गई ! अंकित? तो क्या अंकित की फैमिली उसके घर आई है? वो आया है? क्या कर रहा है वो यहाँ...?कुसुम ने आव देखा ना ताव, और झट से बाथरूम की ओर दौड़ गई। जाते वक्त उसने घड़ी पर नज़र डाली ! सुबह के नौ बज ...और पढ़े