यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं। हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तों की खामोशी, दूरियाँ, और वो एहसास जिन्हें हम शब्द नहीं दे पाते। यहाँ आपको कोई हीरो या परफेक्ट अंत नहीं मिलेगा, बल्कि ऐसे किरदार मिलेंगे जो बिल्कुल हमारी तरह हैं - थोड़े उलझे हुए, थोड़े थके हुए, पर फिर भी आगे बढ़ते हुए। यह कहानियाँ आपको सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि खुद को महसूस करने के लिए लिखी गई हैं। शायद कहीं न कहीं, हर पन्ने पर आपको अपनी ही ज़िंदगी की झलक मिले। क्योंकि सच तो यही है - हम सब बाहर से ठीक दिखते हैं, पर अंदर कहीं न कहीं एक सवाल हमेशा रहता है… क्या सब ठीक है?
क्या सब ठीक है - 1
क्या सब ठीक है? ******************************************************** यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अंदर दबाकर जीते रहते हैं।हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तों की खामोशी, दूरियाँ, और वो एहसास जिन्हें हम शब्द नहीं दे पाते। यहाँ आपको कोई हीरो या परफेक्ट अंत नहीं मिलेगा,बल्कि ऐसे किरदार मिलेंगे जो बिल्कुल हमारी तरह हैं - थोड़े उलझे हुए, थोड़े थके हुए, पर फिर भी आगे बढ़ते हुए। यह कहानियाँ आपको सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि खुद को महसूस करने के लिए लिखी गई ...और पढ़े
क्या सब ठीक है - 2
क्या सब ठीक है? ************************************************* यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अंदर दबाकर जीते रहते हैं।हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तों की खामोशी, दूरियाँ, और वो एहसास जिन्हें हम शब्द नहीं दे पाते। यहाँ आपको कोई हीरो या परफेक्ट अंत नहीं मिलेगा,बल्कि ऐसे किरदार मिलेंगे जो बिल्कुल हमारी तरह हैं - थोड़े उलझे हुए, थोड़े थके हुए, पर फिर भी आगे बढ़ते हुए। यह कहानियाँ आपको सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि खुद को महसूस करने के लिए लिखी गई हैं।शायद ...और पढ़े
क्या सब ठीक है - 3
*************************************************क्या सब ठीक है? ************************************************* यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अंदर दबाकर जीते रहते हैं।हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तों की खामोशी, दूरियाँ, और वो एहसास जिन्हें हम शब्द नहीं दे पाते। यहाँ आपको कोई हीरो या परफेक्ट अंत नहीं मिलेगा,बल्कि ऐसे किरदार मिलेंगे जो बिल्कुल हमारी तरह हैं - थोड़े उलझे हुए, थोड़े थके हुए, पर फिर भी आगे बढ़ते हुए। यह कहानियाँ आपको सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि खुद को महसूस करने के लिए लिखी गई हैं।शायद ...और पढ़े
क्या सब ठीक है - 4
क्या सब ठीक है? ************************************************* यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अंदर दबाकर जीते रहते हैं।हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तों की खामोशी, दूरियाँ, और वो एहसास जिन्हें हम शब्द नहीं दे पाते। यहाँ आपको कोई हीरो या परफेक्ट अंत नहीं मिलेगा,बल्कि ऐसे किरदार मिलेंगे जो बिल्कुल हमारी तरह हैं - थोड़े उलझे हुए, थोड़े थके हुए, पर फिर भी आगे बढ़ते हुए। यह कहानियाँ आपको सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि खुद को महसूस करने के लिए लिखी गई हैं।शायद ...और पढ़े
क्या सब ठीक है - 5
लाइक्स के लिए जीती लड़की...रिया अपने कमरे के आईने के सामने खड़ी थी। हाथ में मोबाइल था और चेहरे नकली मुस्कान। उसने कैमरा ऑन किया, बालों को ठीक किया और फिर एक प्यारी सी मुस्कान के साथ वीडियो रिकॉर्ड करने लगी।“हेलो दोस्तों! कैसी लग रही हूँ आज? अगर वीडियो पसंद आए तो लाइक, शेयर और फॉलो करना मत भूलना…”वीडियो खत्म होते ही उसके चेहरे की मुस्कान अचानक गायब हो गई। उसने गहरी साँस ली और थके हुए कदमों से बिस्तर पर बैठ गई। बाहर शाम हो चुकी थी, लेकिन उसके कमरे में अँधेरा पहले से ही उतर आया था।रिया ...और पढ़े
क्या सब ठीक है - 6
भीड़ में खोया इंसान...दिल्ली जैसे बड़े शहर की सुबह हमेशा शोर से शुरू होती थी। सड़क पर दौड़ती गाड़ियाँ, स्टॉप पर खड़ी लंबी लाइनें, हॉर्न की आवाज़ें और हर चेहरे पर जल्दी का भाव। ऐसा लगता था जैसे पूरा शहर किसी अदृश्य दौड़ में भाग रहा हो।उसी भीड़ का एक हिस्सा था — अर्जुन।करीब तीस साल का साधारण युवक। एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। हर सुबह जल्दी उठना, मेट्रो पकड़ना, ऑफिस जाना और देर रात थककर घर लौट आना उसकी जिंदगी बन चुकी थी।उसके पास सब कुछ था — अच्छी नौकरी, रहने के लिए फ्लैट, बैंक बैलेंस ...और पढ़े