रात के ठीक 2:13 बजे थे। शहर के पुराने सरकारी अस्पताल का पिछला हिस्सा — जहाँ शायद ही कोई जाता हो — अँधेरे में डूबा हुआ था। वहीं था… मॉर्ग। दीवारों पर जमी सीलन, टिमटिमाती हुई पीली लाइट, और हवा में एक अजीब-सी ठंडक। जैसे किसी ने कमरे से सारी गर्मी चुरा ली हो। रवि, नया वार्ड बॉय, अपनी पहली नाइट ड्यूटी पर था। उसे चेतावनी दी गई थी — “रात में अगर मॉर्ग से आवाज़ आए… तो मत जाना।” वह हँस दिया था। लेकिन अब… वो हँसी गले में अटक चुकी थी।

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The Morgue - Part 1

रात के ठीक 2:13 बजे थे। शहर के पुराने सरकारी अस्पताल का पिछला हिस्सा — जहाँ शायद ही कोई हो — अँधेरे में डूबा हुआ था। वहीं था… मॉर्ग। दीवारों पर जमी सीलन, टिमटिमाती हुई पीली लाइट, और हवा में एक अजीब-सी ठंडक। जैसे किसी ने कमरे से सारी गर्मी चुरा ली हो। रवि, नया वार्ड बॉय, अपनी पहली नाइट ड्यूटी पर था। उसे चेतावनी दी गई थी — “रात में अगर मॉर्ग से आवाज़ आए… तो मत जाना।” वह हँस दिया था। लेकिन अब… वो हँसी गले में अटक चुकी थी। पहली आवाज़ठक… ठक… ठक… मॉर्ग के अंदर ...और पढ़े

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The Morgue - Part 2

अजय सिक्योरिटी रूम में बैठा था। मॉर्ग के कैमरे की स्क्रीन अचानक झिलमिलाई। फिर… तस्वीर साफ हुई। बॉक्स नंबर हिल रहा था। धीरे-धीरे। अंदर से। अजय ने ज़ूम किया। स्क्रीन पर साफ दिखा — बॉक्स के अंदर रवि की लाश थी… लेकिन उसकी आँखें खुली हुई थीं। और वह… मुस्कुरा रहा था। अजय हिम्मत करके मॉर्ग तक गया। दरवाज़ा इस बार खुद-ब-खुद खुल गया। अंदर की हवा सड़ी हुई थी… जैसे मांस कई दिनों से सड़ रहा हो। सभी बॉक्स बंद थे। लेकिन फर्श पर… नाखूनों से खींची गई लंबी-लंबी लकीरें थीं। जैसे किसी ने… घिसटते हुए बाहर आने ...और पढ़े

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The Morgue - Part 3

रात के ठीक 2:17 बजे थे। शहर के पुराने सरकारी अस्पताल का मुर्दाघर फिर से उसी ठंडी खामोशी में हुआ था, जहाँ पिछली बार सब कुछ खत्म हुआ था… या शायद शुरू हुआ था। डॉ. आरव को उस रात के बाद कई बार नींद में वही दृश्य दिखाई देता था—स्टील की ट्रे, आधा खुला दरवाज़ा, और वह शव जिसकी आँखें अचानक खुल गई थीं। पुलिस ने केस को “मानसिक तनाव” कहकर बंद कर दिया था, लेकिन आरव जानता था कि सच्चाई कुछ और थी। उस रात उसे फिर से कॉल आया। “सर… मुर्दाघर में कुछ गड़बड़ है,” वार्ड बॉय ...और पढ़े

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