गरमी की छुट्टी लगते ही बनैला गांव के स्कूली बच्चे बोर होने लगे थे। उन्हें किसी काम में मजा नहीं आ रहा था। न बाटी-भौंरा, पिट्ठूल, लुका-छाई, पतंग उड़ाई में और न ही दादा-दादी के किस्से-कहानियों में। ऊपर से उनके खास दोस्त, विवेक व विजय अपने मामा के घर जा चुके थे। वे स्कूल खुलने पर ही लौटकर आनेवाले थे। खेती चूंकि असिंचित थी, इसलिए गरमी के मौसम में खेतों में उनके लिए कुछ काम न था। वे एक-दो बार अपने-अपने पालकों के साथ जंगल में महुआ व साल बीज बीनने और चिरौंजी व आंवला तोड़ने के लिए गए भी, पर वहां भालू के डर से दोबारा-तिबारा जाने से कतराने लगे।
चोर मचाए शोर - 1
गरमी की छुट्टी लगते ही बनैला गांव के स्कूली बच्चे बोर होने लगे थे। उन्हें किसी काम में मजा आ रहा था। न बाटी-भौंरा, पिट्ठूल, लुका-छाई, पतंग उड़ाई में और न ही दादा-दादी के किस्से-कहानियों में।ऊपर से उनके खास दोस्त, विवेक व विजय अपने मामा के घर जा चुके थे। वे स्कूल खुलने पर ही लौटकर आनेवाले थे।खेती चूंकि असिंचित थी, इसलिए गरमी के मौसम में खेतों में उनके लिए कुछ काम न था।वे एक-दो बार अपने-अपने पालकों के साथ जंगल में महुआ व साल बीज बीनने और चिरौंजी व आंवला तोड़ने के लिए गए भी, पर वहां भालू ...और पढ़े
चोर मचाये शोर - 2
बब्बू ने ख्वाब में देखा कि बनवाड़ी के झोपड़ी की परछी में कुत्ता ऐसा उछलकूद मचाने लगा, जैसे अजनबियों चोरों को देख कर संकल से बंधे कुत्ते उछल-कूद मचाया करते हैं।उसकी भौं-भौं की कानफोड़ू आवाज से साहूकार के दामाद की नींद टूट गई, जो दोपहर का खाना खाकर घासफूस की झोपड़ी में बाग की रखवाली करता हुआ आराम फरमा रहा था। वह उठा और बालकों की उम्मीदों के विपरीत बाहर निकल पड़ा।उसकी नजर जैसे ही अमवाड़ी पर पड़ी, वह जोरों से चीखा, ‘‘कौन है यहां?’’इतना सुनना था कि अंदर घुसे चारों लड़के मारे डर के हड़बड़ा गए।बब्बू व मानू, ...और पढ़े