सड़क के दोनों ओर फैले घने, हरे-भरे पेड़ और हल्की छनकर आती धूप... ऐसा लग रहा था मानो किसी टीवी सीरियल का कोई खूबसूरत दृश्य चल रहा हो। रास्ता एकदम सुनसान और शांत था। इसी खूबसूरत राह पर एक काले रंग की कार आराम से बढ़ रही थी। कार के अंदर का माहौल बहुत ही खुशनुमा था। अमित गाड़ी चला रहा था और बगल में बैठी उसकी पत्नी सीमा रेडियो पर बजते पुराने गानों पर गुनगुना रही थी। पीछे की सीट पर बैठी उनकी 15 साल की बेटी, अनन्या, अपने हेडफोन हटाकर माता-पिता की इस मस्ती को देख मुस्कुरा रही थी। तीनों किसी मंजिल पर पहुंचने की खुशी में हंसी-मजाक कर रहे थे, चुटकुले कस रहे थे। पूरा परिवार एक अलग ही सुकून में डूबा हुआ था।
ब्लूबेरी कॉटेज - भाग 1
ब्लूबेरी कॉटेजभाग - १लेखिका "अनामिका"सड़क के दोनों ओर फैले घने, हरे-भरे पेड़ और हल्की छनकर आती धूप... ऐसा लग था मानो किसी टीवी सीरियल का कोई खूबसूरत दृश्य चल रहा हो। रास्ता एकदम सुनसान और शांत था। इसी खूबसूरत राह पर एक काले रंग की कार आराम से बढ़ रही थी। कार के अंदर का माहौल बहुत ही खुशनुमा था।अमित गाड़ी चला रहा था और बगल में बैठी उसकी पत्नी सीमा रेडियो पर बजते पुराने गानों पर गुनगुना रही थी। पीछे की सीट पर बैठी उनकी 15 साल की बेटी, अनन्या, अपने हेडफोन हटाकर माता-पिता की इस मस्ती को ...और पढ़े
ब्लूबेरी कॉटेज - भाग 2
ब्लूबेरी कॉटेजभाग - २लेखिका "अनामिका"अमित ने कांपते हाथों से जैसे ही उस बंद कमरे की कुंडी खोली और दरवाज़ा धकेला, अंदर का नज़ारा देखकर उसके रोंगटे खड़े हो गए।कमरे में कोई मौजूद नहीं था, लेकिन चारों तरफ़ अफ़रा-तफ़री, चीखों और खौफ़नाक सन्नाटे की गूंज साफ़ सुनाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था मानो तीन-चार लोग किसी चीज़ से बुरी तरह डरकर बाहर की तरफ़ भाग रहे हों। सीमा और अनन्या ने घबराकर अमित का हाथ कसकर पकड़ लिया।अमित ने हिम्मत जुटाकर कमरे में दो कदम और आगे बढ़ाए। उसकी नज़र अचानक पलंग के नीचे पड़ी। अंधेरे में एक ...और पढ़े