आज सुबह से ही आकाश में बादल छाए हुए थे, बस बरसात आने की देर थी। मां ने बोला इसलिए वह अपना सारा कामकाज छोड़कर छत पे सुखाए सारे कपड़े एक एक करके उतार रही थी। तभी मां ने आवाज लगाई, "रिमझिम जल्दी कर बारिश आने ही वाली है, सारे कपड़े भीग जायेंगे और जो छत पे पापड़ सुखाए है वो भी ले लेना" रिमझिम ने जल्दी जल्दी हाथ चलाना शुरू कर दिया। वह मां पर गुस्सा होने लगी। "अरे पता था कि आज बारिश आयेगी तो फिर पापड़ सुखाने की क्या जरूरत थी। अब भला इन्हे कोन समझाए।" थोड़ी नाराजगी के साथ वह काम निपटाने लगी। नीचे भी तो काम निपटाना है। उसने सोचा की भला बारिश आ गई और में क्या काम करती रह जाऊंगी।
बारिशवाला प्यार - 1
आज सुबह से ही आकाश में बादल छाए हुए थे, बस बरसात आने की देर थी। मां ने बोला वह अपना सारा कामकाज छोड़कर छत पे सुखाए सारे कपड़े एक एक करके उतार रही थी। तभी मां ने आवाज लगाई,"रिमझिम जल्दी कर बारिश आने ही वाली है, सारे कपड़े भीग जायेंगे और जो छत पे पापड़ सुखाए है वो भी ले लेना"रिमझिम ने जल्दी जल्दी हाथ चलाना शुरू कर दिया। वह मां पर गुस्सा होने लगी।"अरे पता था कि आज बारिश आयेगी तो फिर पापड़ सुखाने की क्या जरूरत थी। अब भला इन्हे कोन समझाए।"थोड़ी नाराजगी के साथ वह ...और पढ़े
बारिशवाला प्यार - 2
बादल ने थोडी देर राह देखी की बारिश रूक जाए, या तो पड़ोसी के गाने बंद हो जाए। पर कुछ नहीं हुआ। उसे लगा की उसे खुद ही पड़ोसी के घर जाना पड़ेगा। पर बरसात भी काफी तेज हो गई थी,ओर वो अपने घर से बाहर कदम रखते ही भीग जाएगा। उसने सोचा अगर वह नही गया तो गाने बजते रहेंगे और उसकी पढ़ाई डिस्टर्ब होती रहेगी। उसने अपने शरीर पर कपड़ा लपेटा और बारिश पसंद न होने के बावजूद वह जाने लगा। बादल कॉलेज के तीसरे वर्ष में था। पढाई में काफ़ी तेज़ था, ...और पढ़े