संदेश रात के साढ़े दस बज रहे थे। शहर की ऊँची इमारतों की खिड़कियों में एक-एक करके रोशनियाँ बुझ रही थीं। सड़क पर वाहनों का शोर अब थककर धीमा पड़ चुका था। हवा में हल्की नमी थी और बालकनी में रखे तुलसी के गमले की पत्तियाँ बिना हवा के भी जैसे काँप रही थीं।उमा बालकनी की रेलिंग पर कोहनी टिकाए सामने फैले अँधेरे को देख रही थी। उसके पीछे दो कमरों का सजा-सँवरा फ्लैट था—महँगा फर्नीचर, चमचमाती फर्श, दीवारों पर आधुनिक चित्र, हर सुविधा मौजूद। किसी बाहरी व्यक्ति को यह घर किसी सुखी दंपती का घर ही लगता। लेकिन घरों का सच हमेशा दीवारों पर नहीं लिखा होता।डाइनिंग टेबल पर दो प्लेटें रखी थीं। एक खाली थी, दूसरी में रखा खाना ठंडा होकर अपनी भाप खो चुका था।घड़ी ने ग्यारह बजने का संकेत दिया। उमा ने मोबाइल उठाया। व्हाट्सऐप खोला। सबसे ऊपर पति का संदेश था—"मीटिंग चल रही है। खाना खा लेना। देर होगी।"
भीड़ में अकेली - 1
भीड़ में अकेलीअध्याय–1 : एक अनजान संदेश रात के साढ़े दस बज रहे थे। शहर की ऊँची इमारतों खिड़कियों में एक-एक करके रोशनियाँ बुझ रही थीं। सड़क पर वाहनों का शोर अब थककर धीमा पड़ चुका था। हवा में हल्की नमी थी और बालकनी में रखे तुलसी के गमले की पत्तियाँ बिना हवा के भी जैसे काँप रही थीं।उमा बालकनी की रेलिंग पर कोहनी टिकाए सामने फैले अँधेरे को देख रही थी। उसके पीछे दो कमरों का सजा-सँवरा फ्लैट था—महँगा फर्नीचर, चमचमाती फर्श, दीवारों पर आधुनिक चित्र, हर सुविधा मौजूद। किसी बाहरी व्यक्ति को यह घर किसी ...और पढ़े