लेखिका की ओर से अक्सर ऐसा होता हे की हमे बचपन से हि दिखाया या अहसास कराया जाता हे के प्रेम कहानिया बस अमर या अद्भुत हि होती हे। जैसे की फिल्मो मे हीरो-हीरोइन या किताबों मे राधा-कृष्णा बस यही हम बचपन से देखते,सुनते ओर अहसास करते हे। हम अपने आस पास के उन छोटी छोटी कहानी पर कभी ध्यान हि नहीं देते वो आम सी काहानी जो हर सहर हर गली हर घर मे होती हे। ऐसी हि एक कहानी, जो एक जोड़े को देखकर अपनी कल्पनाएं मिलाकर बनाई हे,
एक आम सी प्रेम कहानी - 1-2
एक आम सी प्रेम कहानी भाग- १लेखिका "अनामिका"लेखिका की ओर सेअक्सर ऐसा होता हे की हमे बचपन से हि या अहसास कराया जाता हे के प्रेम कहानिया बस अमर या अद्भुत हि होती हे।जैसे की फिल्मो मे हीरो-हीरोइन या किताबों मे राधा-कृष्णा बस यही हम बचपन से देखते,सुनते ओर अहसास करते हे।हम अपने आस पास के उन छोटी छोटी कहानी पर कभी ध्यान हि नहीं देते वो आम सी काहानी जो हर सहर हर गली हर घर मे होती हे।ऐसी हि एक कहानी, जो एक जोड़े को देखकर अपनी कल्पनाएं मिलाकर बनाई हे, एक आम सी प्रेम कहनी....आगे जो ...और पढ़े
एक आम सी प्रेम कहानी - 3
एक आम सी प्रेम कहानीभाग-३लेखिका "अनामिका"भाग-३: पन्नों की खुशबू और एक खट्टी-मीठी तकरार°लड़के का नजरिया (मलय - कॉलेज सेकंड स्टूडेंट)किताबों की उस भीनी-भीनी खुशबू के बीच मैं काउंटर पर अपनी बिलिंग का इंतजार कर रहा था। तभी अचानक कोई मुझसे आकर टकराया। मैं थोड़ा झल्लाकर मुड़ा, लेकिन सामने देखते ही मेरी सारी शिकायत हवा हो गई—यह वही लड़की थी! किस्मत शायद आज मुझ पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान थी। इस बार मैंने मौका हाथ से जाने नहीं देने का फैसला किया। जैसे ही उसने काउंटर पर अपनी किताब रखी, मैंने अपनी किताब भी उसके ठीक बगल में टिका दी ...और पढ़े
एक आम सी प्रेम कहानी - 4
एक आम सी प्रेम कहानीभाग-४लेखिका "अनामिका"भाग-४: सड़क का दो किनारा°लड़के का नज़रिया (मलय-कॉलेज सेकंड ईयर)उसी बस स्टॉप के दूसरे पर आज वो फिर दिखी—स्कूल यूनिफॉर्म में, कंधे पर बस्ता टांगे। मुझे देखते ही उसके चेहरे पर एक हल्की सी शरारती मुस्कान आ गई, जैसे कह रही हो कि बुकस्टोर में मेरे 'बच्ची' बोलने पर वह अब और नाराज़ नहीं है। मेरा मन हुआ कि पास जाकर दोबारा उसे थोड़ा चिढ़ाऊँ, पर तभी मेरी बस आ गई। वक़्त की पाबंदी ने हमें रोक दिया।मैं बेमन से बस में चढ़कर खिड़की वाली सीट पर बैठ गया। जैसे ही बस आगे बढ़ी, ...और पढ़े
एक आम सी प्रेम कहानी - 5
एक आम सी प्रेम कहानीभाग - ५लेखिका "अनामिका"गर्मी की छुट्टियां बीत चुकी थीं। कॉलेज में थर्ड ईयर के पहले कदम रखते हुए मलय के मन में एक अजीब सी बेचैनी थी। वह रोज की तरह बस स्टॉप की तरफ बढ़ा, लेकिन वहां का नजारा देखकर उसके कदम वहीं जम गए।निहारिका आज सड़क के उस पार नहीं, बल्कि सीधे उसी के स्टॉप पर खड़ी थी। स्कूल यूनिफॉर्म की जगह सादे कपड़ों में वह बेहद शांत और अलग लग रही थी। 10थ क्लास में कदम रख चुकी निहारिका के चेहरे पर घबराहट थी, लेकिन इस बार उसने अपनी झिझक को दरकिनार ...और पढ़े
एक आम सी प्रेम कहानी - 6
एक आम सी प्रेम कहानी भाग -६लेखिका "अनामिका" भाग - ६: चार साल बाद – दो अलग दुनियाएँसमय अपनी से बीतता गया और देखते ही देखते चार साल का लंबा वक्त गुजर गया।°लड़की का घर और उसकी दुनिया (निहारिका - कॉलेज स्टूडेंट)निहारिका अब स्कूल की दहलीज लांघकर कॉलेज के फर्स्ट ईयर में पहुँच चुकी थी। लेकिन उसके मिजाज में कोई बदलाव नहीं आया था—वही खिलखिलाती मुस्कान, वही नादानियाँ और वही चुलबुलापन। घर में वह आज भी सबकी लाडली थी। सुबह उसकी चहक से ही घर की शुरुआत होती और उसकी बेफिक्र बातें पूरे माहौल में ताज़गी भर देती थीं।कॉलेज ...और पढ़े
एक आम सी प्रेम कहानी - 7
एक आम सी प्रेम कहानी भाग - ७लेखिका "अनामिका" स्क्रीन पर चमकते अनजान नंबर को देखकर निहारिका का दिल से धड़क उठा। एक उम्मीद के साथ उसने झट से कॉल उठाया।"हेलो?" उसकी आवाज़ में उत्सुकता साफ़ झलक रही थी।"हेलो..." दूसरी तरफ़ से मलय की आवाज़ आई।उस एक शब्द ने जैसे दोनों को वहीं थाम दिया। दोनों तुरंत समझ गए कि फोन पर कौन है। अगले कुछ सेकंड तक दोनों तरफ़ सिर्फ़ एक गहरी खामोशी तैरती रही—ऐसी खामोशी जिसमें बिना कहे बहुत कुछ बयाँ हो रहा था।आख़िरकार मलय ने चुटकी लेते हुए खामोशी तोड़ी, "लगता है मेरा ही इंतज़ार कर ...और पढ़े