रात के ठीक 11:57 बजे थे। मुंबई शहर बारिश में डूबा हुआ था। अनिकेत अपनी कार पार्क करके अपार्टमेंट की ओर बढ़ रहा था। जैसे ही उसने मुख्य दरवाज़ा खोला, उसकी नज़र ज़मीन पर पड़े एक सफेद लिफाफे पर गई। लिफाफे पर न कोई पता था, न कोई टिकट, न भेजने वाले का नाम। सिर्फ़ लाल स्याही से एक वाक्य लिखा था— "अगर ज़िंदा रहना चाहते हो... तो इसे 30 दिन तक मत खोलना।" अनिकेत मुस्कुराया। "आजकल लोग भी कैसी-कैसी प्रैंक करते हैं..." वह लिफाफा उठाकर अपने फ्लैट में चला गया। उसने उसे ड्रॉअर में रख दिया और सो गया। लेकिन उसी रात... ठीक 3:00 बजे... उसकी नींद अचानक खुल गई।
बंद लिफाफा - 1
रात के ठीक 11:57 बजे थे।मुंबई शहर बारिश में डूबा हुआ था।अनिकेत अपनी कार पार्क करके अपार्टमेंट की ओर रहा था। जैसे ही उसने मुख्य दरवाज़ा खोला, उसकी नज़र ज़मीन पर पड़े एक सफेद लिफाफे पर गई।लिफाफे पर न कोई पता था, न कोई टिकट, न भेजने वाले का नाम।सिर्फ़ लाल स्याही से एक वाक्य लिखा था—"अगर ज़िंदा रहना चाहते हो... तो इसे 30 दिन तक मत खोलना।"अनिकेत मुस्कुराया।"आजकल लोग भी कैसी-कैसी प्रैंक करते हैं..."वह लिफाफा उठाकर अपने फ्लैट में चला गया।उसने उसे ड्रॉअर में रख दिया और सो गया।लेकिन उसी रात...ठीक 3:00 बजे...उसकी नींद अचानक खुल गई।पूरा कमरा ...और पढ़े
बंद लिफाफा - 2
बेसमेंट का भारी लोहे का दरवाज़ा अपने-आप बंद हो चुका था।धड़ाम...!आवाज़ इतनी तेज़ थी कि पूरी इमारत काँप उठी।अनिकेत घबराकर दरवाज़ा खोलने की कोशिश की।लेकिन दरवाज़ा बाहर से लॉक हो चुका था।चारों तरफ़ घना अँधेरा...सिर्फ़ इंस्पेक्टर राघव की टॉर्च की हल्की रोशनी।और उसी रोशनी में...दीवार पर लाल रंग से लिखा था—"WELCOME, ANIKET"अनिकेत की धड़कनें तेज़ हो गईं।"यहाँ मेरा नाम किसने लिखा?"तभी...अँधेरे में किसी के ताली बजाने की आवाज़ आई।ठक... ठक... ठक...फिर वही भारी आवाज़..."तुम ठीक समय पर आए हो..."राघव ने तुरंत अपनी पिस्तौल निकाल ली।"कौन है? सामने आओ!"लेकिन कोई दिखाई नहीं दिया।कुछ सेकंड बाद...बेसमेंट की पुरानी ट्यूब लाइट अपने-आप ...और पढ़े
बंद लिफाफा - 3
अनिकेत के हाथ काँप रहे थे।मोबाइल की स्क्रीन पर अब भी वही संदेश चमक रहा था—"पीछे मुड़कर मत देखना..."लेकिन पीछे मुड़ चुका था।अँधेरे में...करीब पचास कदम दूर...एक आदमी खड़ा था।काले कपड़े...काला मास्क...और हाथ में एक सफ़ेद लिफाफा।वह धीरे-धीरे ताली बजा रहा था।ठक... ठक... ठक...इंस्पेक्टर राघव ने तुरंत पिस्तौल तान दी।"रुको!"लेकिन उस आदमी ने भागने की कोशिश नहीं की।वह बस मुस्कुराया...और मास्क उतार दिया।अनिकेत की आँखें फैल गईं।राघव के मुँह से सिर्फ़ एक शब्द निकला—"अ... अर्जुन?"वही चेहरा...वही आँखें...तीस साल पुरानी तस्वीर वाला आदमी।राघव के मृत घोषित किए गए बड़े भाई—अर्जुन।"यह... यह कैसे हो सकता है?" राघव की आवाज़ काँप रही ...और पढ़े
बंद लिफाफा - 4
सुबह के छह बज चुके थे।पहाड़ी के नीचे टूटी हुई जीप के पास अनिकेत अकेला खड़ा था।इंस्पेक्टर राघव का पता नहीं था।चारों तरफ़ सिर्फ़ धुआँ...टूटा हुआ शीशा...और जीप के दरवाज़े पर उँगली से लिखा हुआ संदेश—"राघव हमारे साथ है..."अनिकेत ने फिर से वह धातु की प्लेट उठाई।उस पर उभरा हुआ चिन्ह था—एक सफेद लिफाफा... और उसके चारों ओर बना हुआ एक गोल घेरा।नीचे सिर्फ़ दो शब्द लिखे थे—THE CIRCLEतभी पीछे से किसी ने कहा—"अगर ज़िंदा रहना है...तो उस निशान को अभी फेंक दो।"अनिकेत पलटा।करीब साठ साल का एक बूढ़ा आदमी वहाँ खड़ा था।सफेद दाढ़ी...कंधे पर पुराना बैग...और आँखों में ...और पढ़े
बंद लिफाफा - 5
अब समय आ गया है राज से पड़दा उठने कालोहे का दरवाज़ा बंद हो चुका था।पूरा तहख़ाना सन्नाटे में हुआ था।अनिकेत की नज़र सामने खड़े आदमी पर टिकी थी।वही चेहरा...वही मुस्कान...आदित्य राय।जिसे दुनिया तीस साल पहले मर चुका मान चुकी थी।आदित्य ने सफ़ेद लिफाफा अनिकेत की ओर बढ़ाया।"इसे खोलो..."इस बार लिफाफे पर कोई चेतावनी नहीं थी।सिर्फ़ एक शब्द लिखा था—"सच।"अनिकेत ने काँपते हाथों से लिफाफा खोला।अंदर एक डीएनए रिपोर्ट थी।ऊपर दो नाम लिखे थे—आदित्य रायअनिकेत मल्होत्रा (आर्यन)रिपोर्ट के नीचे लिखा था—"पिता-पुत्र संबंध – 99.99% सत्यापित।"अनिकेत कुछ पल तक कुछ बोल ही नहीं पाया।"तो... आप सच में मेरे पिता हैं?"आदित्य ...और पढ़े