बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं

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प्यार खेल नहीं एपिसोड 1 — वह रात जब सब कुछ बिखर गया मुंबई। एक ऐसा शहर जो कभी सोता नहीं। यहाँ दिन में भी भीड़ होती है और रात में भी। यहाँ की सड़कें कभी खाली नहीं होतीं, यहाँ की हवा में हमेशा एक शोर रहता है — गाड़ियों का, लोगों का, ज़िंदगी का। लेकिन इसी शोर के बीच कभी-कभी एक ऐसी चीख़ दब जाती है जो किसी को सुनाई नहीं देती। एक ऐसा दर्द जो किसी को नज़र नहीं आता। और आज — इसी मुंबई की एक छोटी सी चाल में — एक परिवार हमेशा के लिए टूटने वाला था। धारावी की गलियाँ शाम के वक़्त और भी तंग लगती हैं। जहाँ एक तरफ बच्चे खेल रहे होते हैं, औरतें दरवाज़े पर बैठकर बातें करती हैं, मर्द थके-हारे काम से लौटते हैं — वहीं एक कमरे से आज ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ें आ रही थीं।

Full Novel

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 1

प्यार खेल नहींएपिसोड 1 — वह रात जब सब कुछ बिखर गयामुंबई।एक ऐसा शहर जो कभी सोता नहीं।यहाँ दिन भी भीड़ होती है और रात में भी। यहाँ की सड़कें कभी खाली नहीं होतीं, यहाँ की हवा में हमेशा एक शोर रहता है — गाड़ियों का, लोगों का, ज़िंदगी का। लेकिन इसी शोर के बीच कभी-कभी एक ऐसी चीख़ दब जाती है जो किसी को सुनाई नहीं देती। एक ऐसा दर्द जो किसी को नज़र नहीं आता।और आज — इसी मुंबई की एक छोटी सी चाल में — एक परिवार हमेशा के लिए टूटने वाला था।धारावी की गलियाँ शाम ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 2

बर्बाद इश्कएपिसोड 2 — मुंबई के तीन शहज़ादे20 साल बाद।मुंबई बदल गई थी।लेकिन धारावी की वह गलियाँ आज भी ही थीं। वही तंग रास्ते, वही शोर, वही भीड़। लेकिन इन्हीं गलियों से निकले तीन लड़के आज मुंबई के सबसे खतरनाक नाम बन चुके थे।रणवीर। आदित्य। दानिश।तीन भाई। तीन शहज़ादे। और मुंबई उनका राज।रात के ग्यारह बज रहे थे।मुंबई के सबसे महँगे इलाके — बांद्रा में एक बड़ी सी बिल्डिंग थी। ऊपर से नीचे तक काले शीशों से ढकी हुई। बाहर दस-बारह गाड़ियाँ खड़ी थीं। दरवाज़े पर चार-चार गार्ड।यह था — मेहता एम्पायर।विक्रम मेहता ने जो साम्राज्य बनाया था — ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 3

बर्बाद इश्कएपिसोड 3 — पहली मुलाकात... पहली मुसीबत!सुबह के दस बज रहे थे।मुंबई की सड़कें अपनी रफ़्तार में थीं। का शोर, लोगों की भागदौड़ — सब कुछ वैसा ही था जैसा हमेशा होता है।लेकिन आज कुछ अलग होने वाला था। रणवीर और नायरा — पहली टक्कर!रणवीर की काली BMW सड़क पर दौड़ रही थी।वह अकेला था। आगे एक ज़रूरी मीटिंग थी। दिमाग़ में ज़ाफ़र का नाम था। चेहरे पर वही ठंडा भाव।तभी—धड़ाम!एक स्कूटी सीधे उसकी गाड़ी के आगे आ गई।रणवीर ने ब्रेक मारा। गाड़ी रुकी। उसकी आँखें तन गईं।"यह किसकी हिम्मत है?"वह गाड़ी से बाहर निकला। गुस्से से दरवाज़ा ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 4

बर्बाद इश्कएपिसोड 4 — जब दिल ने पहली बार महसूस कियामुंबई की सुबह।सूरज अभी पूरी तरह निकला नहीं था। में नारंगी और गुलाबी रंग घुले हुए थे। सड़कों पर अभी भीड़ कम थी। चाय की दुकानें खुल रही थीं। अख़बार वाले साइकिल पर निकले हुए थे।लेकिन तीन घरों में — तीन लोग रात भर सो नहीं पाए थे। रणवीर — वह लड़की कौन थी?रणवीर सुबह चार बजे से उठा हुआ था।यह उसकी आदत नहीं थी। वह आमतौर पर रात को देर से सोता था और सुबह देर से उठता था। लेकिन आज नींद आई ही नहीं।वह अपने कमरे की ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 5

बर्बाद इश्कएपिसोड 5 — जब खेल शुरू हुआमुंबई की सुबह फिर आई।लेकिन आज तीन अलग-अलग जगहों पर तीन अलग-अलग एक साथ आगे बढ़ने वाली थीं। रणवीर और नायरा — बेकरी में तूफ़ान!बांद्रा की एक छोटी सी गली में "नायरा'ज़ बेकरी" थी।छोटी सी दुकान। बाहर पीले रंग का बोर्ड। अंदर से केक और ब्रेड की मीठी खुशबू आती थी। सुबह के वक़्त यहाँ हमेशा भीड़ रहती थी।नायरा काउंटर पर थी।गुलाबी रंग का एप्रन पहने। बाल बाँधे हुए। एक हाथ में ट्रे और दूसरे हाथ से बिल बना रही थी।"भैया — दो क्रोसाँ और एक चॉकलेट मफ़िन। सही है ना?""हाँ हाँ।""तीन ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 6

बर्बाद इश्कएपिसोड 6 — जब दिल और दिमाग़ लड़ने लगेमुंबई में शाम का वक़्त सबसे अजीब होता है।न पूरा होता है न पूरी रात। एक अजीब सी कशमकश होती है — आसमान में नारंगी और काले रंग की लड़ाई। और शायद इसीलिए शाम के वक़्त दिल भी कशमकश में होता है।आज तीन दिलों में वही कशमकश थी। रणवीर और नायरा — इस बार नायरा का घर!रणवीर अपने ऑफ़िस में बैठा था।सामने ज़ाफ़र की फ़ाइल थी। लेकिन नज़र बार-बार खिड़की की तरफ जाती थी।उसके आदमी ने दरवाज़ा खटखटाया।"भाई — नायरा शर्मा के बारे में कुछ और पता चला।"रणवीर ने इशारा ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 7

बर्बाद इश्कएपिसोड 7 — जब दिल ने मानामुंबई में बारिश का पहला दिन।आसमान से पानी गिर रहा था। सड़कें रही थीं। लोग छाते लेकर भाग रहे थे। चाय की दुकानों पर भीड़ थी।और तीन जगहों पर — तीन कहानियाँ आज एक नए मोड़ पर थीं। रणवीर और नायरा — बारिश में भीगी बातबारिश तेज़ थी।नायरा की बेकरी के बाहर पानी भर गया था। वह अंदर से झाड़ू लेकर पानी निकाल रही थी। अकेली। भीगती हुई।तभी एक काली गाड़ी रुकी।रणवीर निकला।बिना छाते के।नायरा ने देखा। झाड़ू रोकी।"आज मफ़िन बंद है। बारिश में सामान ख़राब हो गया।"रणवीर ने जवाब नहीं दिया।उसने ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 8

बर्बाद इश्कएपिसोड 8 — जब राज़ खुलने लगेमुंबई में सुबह की धूप बारिश के बाद और भी चमकीली लगती रात भर रोने के बाद आँखें साफ़ हो जाती हैं। जैसे दर्द के बाद एक अजीब सी शांति आती है।लेकिन आज — तीन जगहों पर — तीन तूफ़ान और आने वाले थे। रणवीर और नायरा — सच का सामनासुबह के नौ बजे।नायरा की बेकरी में आज भीड़ थी।बारिश के बाद धूप निकली थी और लोग घर से निकले थे। नायरा एक साथ तीन काम कर रही थी — बिल बना रही थी, ऑर्डर दे रही थी और फ़ोन पर किसी ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 9

बर्बाद इश्कएपिसोड 9 — जब दुश्मन क़रीब आयामुंबई में रात का एक अजीब चेहरा होता है।दिन में यह शहर करता है। शाम को साँस लेता है। लेकिन रात को — रात को यह शहर अपना असली रूप दिखाता है। जब सड़कें सुनसान होती हैं। जब रोशनियाँ कम होती हैं। जब वह लोग निकलते हैं जो दिन में छुपे रहते हैं।और आज की रात — कुछ होने वाला था। रणवीर — ज़ाफ़र का पहला वारसुबह के पाँच बजे।रणवीर का फ़ोन बजा।उसने आँखें खोलीं। नंबर देखा।अपने सबसे भरोसेमंद आदमी — सलीम का नंबर था।"हाँ।""भाई।" सलीम की आवाज़ में घबराहट थी। "पोर्ट ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 10

बर्बाद इश्कएपिसोड 10 — जब प्यार और ख़तरा साथ आएमुंबई में कुछ दिन ऐसे होते हैं जब हवा में खतरे की बू होती है।जब सब कुछ ठीक लगता है — लेकिन अंदर से एक बेचैनी होती है। जैसे तूफ़ान आने से पहले की ख़ामोशी।आज वही दिन था। रणवीर और नायरा — वह पल जो दिल ने मानासुबह के आठ बजे।नायरा बेकरी खोल रही थी।उसने शटर उठाया। अंदर गई। लाइट जलाई।और तभी देखा — दरवाज़े के बाहर दो आदमी खड़े थे।वह चौंकी।"कौन हो तुम लोग?"दोनों ने एक-दूसरे को देखा।"मैडम — हम बस यहाँ हैं।""क्यों?""भाई ने भेजा है।"नायरा समझ गई।भाई — ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 11

बर्बाद इश्कएपिसोड 11 — जब तूफ़ान आयामुंबई में कुछ रातें ऐसी होती हैं जो इतिहास बदल देती हैं।जब सड़कें होती हैं। जब हवा में एक अजीब सी बेचैनी होती है। जब लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला है।आज वह रात थी।तीन दिन बीत चुके थे।और ज़ाफ़र ने अपना अगला क़दम उठा लिया था। रणवीर — जब दुश्मन ने सबसे गहरी चोट मारीसुबह के छह बजे।रणवीर का फ़ोन बजा।सलीम था।"भाई।"आवाज़ में कुछ था। कुछ ऐसा जो रणवीर ने पहले नहीं सुना था।"क्या हुआ?""भाई — नायरा मैडम—"रणवीर उठ गया।"क्या हुआ नायरा को?""भाई — रात को — हमारे आदमियों को किसी ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 12

एपिसोड 12 — जब दिल ने पहली बार कहामुंबई में सुबह की पहली रोशनी जब आती है तो लगता जैसे रात के सारे ज़ख्म धुल गए।लेकिन ज़ख्म धुलते नहीं। छुप जाते हैं।और छुपे हुए ज़ख्म — कभी न कभी सामने आते हैं।आज वह दिन था। रणवीर और नायरा — वह लम्हा जो हमेशा याद रहेगासुबह के सात बजे।नायरा अपने घर में थी।रात वाली घटना के बाद रणवीर ने उसे घर भेजा था। तीन आदमी बाहर थे।नायरा सो नहीं पाई थी।वह रसोई में बैठी चाय बना रही थी।माँ अभी सोई थीं।नायरा के हाथ पर रस्सी के निशान थे। उसने देखा।रात ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 13

बर्बाद इश्कएपिसोड 13 — जब पुराना ज़ख्म हरा हुआमुंबई में कुछ सच ऐसे होते हैं जो दबे रहते हैं।ज़मीन नीचे। दिल के नीचे। सालों तक।लेकिन जब निकलते हैं — तो सब कुछ हिला देते हैं।आज वह सच निकलने वाला था। रणवीर — वह ख़बर जिसने सब हिला दियासुबह के दस बजे।रणवीर अपने ऑफ़िस में था।फ़ाइलें थीं। काम था। लेकिन मन नायरा में था।तभी सलीम आया।चेहरा अजीब था।"भाई — एक ख़बर है।""क्या?""भाई — यह — यह आप बैठकर सुनो।"रणवीर ने उसे देखा।"बोलो।"सलीम ने एक काग़ज़ रखा।"भाई — ज़ाफ़र ने — ज़ाफ़र ने राजेश साहब को ढूँढ लिया है।"कमरे में ख़ामोशी ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 14

बर्बाद इश्कएपिसोड 14 — जब माज़ी लौटामुंबई में कुछ रातें ऐसी होती हैं जब पुराने ज़ख्म नए लगने लगते आप सोचते हो कि सब ठीक हो गया — और तभी — कोई पुराना दरवाज़ा खुलता है।और उस दरवाज़े के पीछे — वह सब होता है जिसे आप भूलना चाहते थे।आज वह दरवाज़ा खुला। रणवीर — जब माँ का नाम आयासुबह के आठ बजे।विक्रम मेहता के घर में।राजेश नाश्ते की मेज़ पर थे।पहली बार — इस घर में — पाँच लोग एक साथ बैठे थे।विक्रम। राजेश। रणवीर। आदित्य। दानिश।नाश्ता हो रहा था।राजेश चुप थे। लेकिन उनकी आँखें तीनों बेटों पर ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 15

बर्बाद इश्कएपिसोड 15 — जब सपना बनी हथियारमुंबई में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो ज़िंदगी से इतने टूट हैं कि दुश्मन उन्हें आसानी से इस्तेमाल कर लेते हैं।सपना ऐसी ही थी।टूटी हुई। अकेली। और अब — ज़ाफ़र की नज़र में। ज़ाफ़र का नया जालसुबह के नौ बजे।सपना के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया।उसने खोला।सामने एक अजनबी था।"सपना जी?""हाँ।""मेरा नाम करीम है। ज़ाफ़र साहब ने भेजा है।"सपना ने उसे देखा।"ज़ाफ़र? मैं नहीं जानती किसी ज़ाफ़र को।""जानती होंगी अब।" करीम ने कहा। "अंदर आ सकता हूँ?"सपना ने रास्ता नहीं दिया।"क्या काम है?""आपके बेटे — रणवीर मेहता। उनसे जुड़ा काम है।"सपना का ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 16

बर्बाद इश्कएपिसोड 16 — जब असली तूफ़ान आयामुंबई में कहते हैं कि जब एक मुसीबत जाती है तो दूसरी खटखटाती है।ज़ाफ़र गया।लेकिन इमरान आया।और इमरान — इमरान ज़ाफ़र से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक था। इमरान — एक नया ख़ौफ़रात के बारह बजे।मुंबई के एक बड़े होटल में।एक कमरे में बैठा था — इमरान।पैंतालीस साल का। भारी जिस्म। आँखों में एक ठंडी क्रूरता।सामने उसके पाँच आदमी थे।"ज़ाफ़र पकड़ा गया।" इमरान ने कहा। आवाज़ धीमी थी। लेकिन उसमें एक ख़तरा था। "मेरा भाई — पुलिस के हाथ में है।"कोई नहीं बोला।"रणवीर मेहता।" इमरान ने नाम लिया। "उसने यह किया।""जी सरकार।"इमरान ने गिलास ...और पढ़े

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 17

बर्बाद इश्कएपिसोड 17 — जब राणा आयामुंबई में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सुनते ही हवा बदल जाती नाम मुंबई की गलियों में फुसफुसाहट की तरह चलता था। कोई ज़ोर से नहीं लेता था। क्योंकि जो ज़ोर से लेता था — वह फिर नहीं दिखता था।और आज — वह नाम — मुंबई में ख़ुद चलकर आया था। राणा — मुंबई मेंसुबह के सात बजे।मुंबई एयरपोर्ट।एक प्राइवेट जेट उतरी।उसमें से निकला — राणा।साठ साल के क़रीब। लेकिन जिस्म में अभी भी ताक़त थी। सफ़ेद सूट। चाँदी जैसे बाल। आँखों में एक ऐसी ठंडक जो रेगिस्तान की सर्दी जैसी थी।उसके ...और पढ़े

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