बस्ती की तंग गलियों में धूल उड़ रही थी। सूरज की तपिश कच्ची छतों को झुलसा रही थी, लेकिन सात के नील के पैरों में जैसे पहिए लगे थे। ‎"माँ! मैं खेलने जा रहा हूँ," उसने माथे का पसीना पोंछते हुए चिल्लाकर कहा। ‎ ‎उसकी माँ, जो फटे हुए कपड़ों के ढेर से कुछ काम का ढूँढ रही थी, रुकी और उसे गौर से देखा। उसकी आवाज़ में एक चेतावनी थी, जो हर गरीब माँ की सबसे बड़ी पूँजी होती है—स्वाभिमान।

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अकथ - भाग 1

बस्ती की तंग गलियों में धूल उड़ रही थी। सूरज की तपिश कच्ची छतों को रही थी, लेकिन सात के नील के पैरों में जैसे पहिए लगे थे।‎ माँ! मैं खेलने जा रहा हूँ, उसने माथे का पसीना पोंछते हुए चिल्लाकर कहा।‎‎उसकी माँ, जो फटे हुए कपड़ों के ढेर से कुछ काम का ढूँढ रही थी, रुकी और उसे गौर से देखा। उसकी आवाज़ में एक चेतावनी थी, जो हर गरीब माँ की सबसे बड़ी पूँजी होती है—स्वाभिमान।‎ जा, पर देख... ज्यादा बदमाशी मत करना। बस अपने खेल पर ...और पढ़े

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अकथ - भाग 2

भाग - 2अवनि ने अपनी आँखों के सामने देखा—वो सफेद कार, जिसने नील को टक्कर मारी थी, एक पल लिए रुकी और फिर तेज़ रफ़्तार में धुंआ उड़ाती हुई भाग निकली। अवनि ने काँपते हुए उस भागती कार का नंबर पढ़ने की कोशिश की, पर उसकी आँखों के सामने धुंध छा गई थी।‎सड़क के बीचों-बीच नील पड़ा था। उसका छोटा सा शरीर बेजान लग रहा था और उसके सिर के नीचे से खून का एक गहरा लाल दरिया बहने लगा था।‎"एम्बुलेंस! कोई एम्बुलेंस बुलाओ!" अवनि के गले से एक चीख निकली जो शायद पूरी बस्ती तक सुनाई दी होगी।‎भीड़ ...और पढ़े

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अकथ - भाग 3

भाग 3अवनि ने कांपते हाथों से घर का दरवाज़ा खटखटाया। अंदर से कदमों की आवाज़ आई और दरवाज़ा खुला।‎सामने खड़ी थीं। वे देख नहीं सकती थीं, इसलिए वो हर चीज़ महसूस करके समझ जाती थीं। वो चुपचाप खड़ी रहीं, जैसे अवनि के कुछ बोलने का इंतज़ार कर रही हों। अवनि के चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था, और माथे पर पसीना था। .‎माँ ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अवनि का दाहिना हाथ पकड़ लिया।‎"आ गई मेरी बच्ची?" माँ ने प्यार से पूछा।‎‎अवनि एकदम से डर गई। उसके उसी हाथ पर खून के सूखे हुए छोटे-छोटे दाग थे। ...और पढ़े

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अकथ - भाग 4

‎सुबह की पहली किरण के साथ ही अवनी के सर में एक अजीब सा दर्द था। भारी मन से फोन उठाया और अपने बॉस का नंबर डायल किया।‎"हेलो सर, मुझे आज एक दिन की छुट्टी चाहिए थी। मेरी तबीयत ठीक नहीं है," अवनी ने ढीली आवाज़ में कहा।‎उधर से बॉस की कड़क आवाज़ आई, "क्या? छुट्टी? अवनी, ऑफिस में पहले ही काम का पहाड़ खड़ा है और तुमने कल की जरूरी फाइल भी अभी तक नहीं भेजी है। आज तो तुम्हें आना ही पड़ेगा।"‎"लेकिन सर, प्लीज... बस आज आज की बात है," अवनी ने मिन्नत की।‎बॉस का पारा चढ़ ...और पढ़े

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