मुंबई की चकाचौंध भरी रोशनियों के बीच, आर्यन का मन कहीं और ही भटक रहा था। वह अपने लैपटॉप की स्क्रीन पर उन पुरानी तस्वीरों को ज़ूम कर रहा था जो उसे उस रहस्यमयी पीले लिफाफे में मिली थीं। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, और बिजली की कड़कड़ाहट उसके कमरे की खामोशी को बार-बार चीर रही थी। आर्यन, जो एक मशहूर 'पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेटर' और व्लॉगर था, ने अपनी ज़िंदगी में कई पुराने किले, खंडहर और श्मशान देखे थे, लेकिन इस बार कुछ अलग था। वह लिफाफा, वह पुराना खुरदरा कागज़, और उस पर लिखी वे टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें—उनमें एक अजीब सी कशिश थी, जैसे कोई उसे सदियों पुराने अंधेरे से पुकार रहा हो।
राज-ए-खंडहर: श्रापित विरासत - 1
अध्याय 1: स्याही का निमंत्रण मुंबई की चकाचौंध भरी रोशनियों के बीच, आर्यन का मन कहीं और ही भटक था। वह अपने लैपटॉप की स्क्रीन पर उन पुरानी तस्वीरों को ज़ूम कर रहा था जो उसे उस रहस्यमयी पीले लिफाफे में मिली थीं। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, और बिजली की कड़कड़ाहट उसके कमरे की खामोशी को बार-बार चीर रही थी। आर्यन, जो एक मशहूर 'पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेटर' और व्लॉगर था, ने अपनी ज़िंदगी में कई पुराने किले, खंडहर और श्मशान देखे थे, लेकिन इस बार कुछ अलग था। वह लिफाफा, वह पुराना खुरदरा कागज़, और उस पर लिखी ...और पढ़े
राज-ए-खंडहर: श्रापित विरासत - 2
अध्याय 2: हवेली की दीवारों के राज़आर्यन ने हवेली के भारी-भरकम लोहे के दरवाज़े को धक्का दिया। दरवाज़ा एक चीख के साथ खुला जैसे कोई सदियों से दर्द में कराह रहा हो। अंदर घुसते ही एक ऐसी ठंडी और नमी वाली हवा का झोंका उसके चेहरे से टकराया, जिसने उसके खून को जमा दिया। उस हवा में मिट्टी, सड़ी हुई लकड़ी और पुराने कागज़ों की एक अजीब सी महक थी। आर्यन ने अपना कैमरा निकाला और उसकी पावरफुल एलईडी लाइट ऑन की। रोशनी का घेरा जैसे ही विशाल हॉल में फैला, आर्यन की धड़कनें रुक सी गईं। हॉल इतना ...और पढ़े
राज-ए-खंडहर: श्रापित विरासत - 3
अध्याय 3: तहखाने का राज़ और श्रापित डायरी आर्यन की सांसें फूल रही थीं। हॉल का दरवाजा किसी ने से बंद नहीं किया था, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे दीवारों ने ही उसे अपनी जकड़ में ले लिया हो। उसने अपने कैमरे की लाइट चारों तरफ घुमाई, लेकिन अंधेरा रोशनी को निगल रहा था। तभी उसकी नज़र फर्श पर पड़ी एक अजीब सी चीज़ पर गई। एक पुराना, पीतल का छल्ला (ring) जो ज़मीन पर एक खुफिया दरवाज़े (trapdoor) से जुड़ा था। आर्यन ने हिम्मत जुटाई और उस छल्ले को ज़ोर से खींचा। एक भारी पत्थर की सिल ...और पढ़े
राज-ए-खंडहर: श्रापित विरासत - 4
अध्याय 4: रूहानी भूल-भुलैया तहखाने की उस ठंडी और घुटन भरी हवा में आर्यन का दम घुटने लगा था। हाथ में मौजूद डायरी जैसे-जैसे वह पढ़ रहा था, उसे महसूस हो रहा था कि वह कागज़ नहीं, बल्कि किसी की धड़कती हुई खाल को छू रहा है। ऊपर छत पर चिपकी वह औरत—ज़ोया—अचानक एक चीख के साथ नीचे झपटी। आर्यन ने फुर्ती से खुद को एक तरफ फेंका और वह औरत ज़मीन पर किसी जानवर की तरह चारों पैरों पर लैंड हुई। उसकी सफेद आँखों में कोई रहम नहीं था, सिर्फ सदियों पुरानी प्यास थी। "तुम... तुम क्या चाहती ...और पढ़े
राज-ए-खंडहर: श्रापित विरासत - 5
अध्याय 5: स्याही का काला सच आर्यन की सांसें धौंकनी की तरह चल रही थीं। 'स्याही' गाँव का वह सन्नाटा अब हवेली के अंदर एक गूँजती हुई चीख में बदल चुका था। जैसे ही उसने 'अटारी' (Attic) का दरवाज़ा खोला, उसे लगा जैसे वह वक्त के किसी पुराने हिस्से में पहुँच गया हो। वहाँ चारों तरफ पुरानी कड़ियों से लटकी हुई जंजीरें थीं और फर्श पर वही 'स्याही' जैसा काला गाढ़ा तरल पदार्थ फैला था, जो दीवारों से धीरे-धीरे रिस रहा था। कमरे के बीचों-बीच एक बड़ा आदमकद आईना रखा था, लेकिन उसमें धूल नहीं थी—वह आईना चमक रहा ...और पढ़े