योगेश और संगीता का घर जगमगा रहा था। सुंदर बिजली की लड़ियाँ मानो बार-बार खिलखिला कर हँस रही थीं। आने-जाने वालों का मन मोहने वाली इस घर की सुंदरता में ताज़े फूलों की ख़ुशबू अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही थी। शहनाई की मद्धम-मद्धम आवाज़ लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। आज योगेश और संगीता की बेटी अनन्या की शादी थी। चमकती रोशनी और फूलों को कहाँ मालूम था कि उनकी चमक और ख़ुशबू भले कितनी ही मनमोहक क्यों न हो, लेकिन किसी एक को वह खल रही थी। मंडप में बारात आ चुकी थी।

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बड़े दिल वाला - भाग - 1

योगेश और संगीता का घर जगमगा रहा था। सुंदर बिजली की लड़ियाँ मानो बार-बार खिलखिला कर हँस रही थीं। वालों का मन मोहने वाली इस घर की सुंदरता में ताज़े फूलों की ख़ुशबू अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही थी। शहनाई की मद्धम-मद्धम आवाज़ लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। आज योगेश और संगीता की बेटी अनन्या की शादी थी। चमकती रोशनी और फूलों को कहाँ मालूम था कि उनकी चमक और ख़ुशबू भले कितनी ही मनमोहक क्यों न हो, लेकिन किसी एक को वह खल रही थी। मंडप में बारात आ चुकी थी। अनन्या को मंडप में ...और पढ़े

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बड़े दिल वाला - भाग - 2

अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या की शादी के दिन उसका मन भारी था। वह अपने प्रेमी वीर से करना चाहती थी, लेकिन माता-पिता के विरोध के कारण उसे अनुराग से शादी करनी पड़ रही थी। मंडप में बैठते हुए भी उसका दिल अंदर ही अंदर संघर्ष कर रहा था। आगे क्या हुआ अब पढ़िए: - पंडित के मंत्र उच्चारण के बीच भी अनुराग का मन बेचैन हो रहा था। उसे कुछ ठीक नहीं लग रहा था। वह सोच रहा था कि अनन्या से एक बार पूछ ले कि आख़िर वह लगातार रो क्यों रही है। लेकिन उसे ऐसा ...और पढ़े

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बड़े दिल वाला - भाग - 3

अभी तक आपने पढ़ा कि अनुराग और अनन्या का विवाह मंत्रों और सात फेरों के साथ संपन्न हुआ, विदाई अनन्या अपने माता-पिता से लिपटकर रोती रही। अनुराग ने उसे सांत्वना दी, लेकिन कार में बैठते ही अनन्या ने भीड़ में अपने प्रेमी वीर को देखकर घबराहट से अपना सिर हटा लिया। आगे क्या हुआ अब पढ़िए: - वीर को इस तरह बारातियों के बीच खड़ा देखकर अनन्या घबरा रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। तभी उसने देखा वीर ने अपनी आंखों पर काला चश्मा चढ़ा लिया और सर पर लगी टोपी को काफ़ी ...और पढ़े

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बड़े दिल वाला - भाग - 4

अभी तक आपने पढ़ा कि बारातियों के बीच वीर अचानक आकर अनुराग से मिला और अनन्या को बधाई देते उसका हाथ ज़ोर से दबाकर एक कागज़ थमा गया। अनुराग को उसका व्यवहार अजीब लगा, पर अनन्या के मन में वीर की मौजूदगी गहरी बेचैनी छोड़ गई। आगे क्या हुआ अब पढ़िए: - इस तरह वीर के वहाँ आ जाने से अनन्या की बेचैनी बढ़ गई थी। उसके दिलो दिमाग़ में एक ही विचार आ रहा था कि वीर ने उस कागज़ में क्या लिखा होगा। वह उस कागज़ को निकाल कर पढ़ना चाहती थी लेकिन यह तो संभव नहीं ...और पढ़े

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बड़े दिल वाला - भाग - 5

अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या वीर के पत्र को पढ़कर भावुक हो गई और मन ही मन अनुराग दूरी बनाने का निश्चय करने लगी। ससुराल में स्वागत के बाद भी उसके विचार वीर के इर्द-गिर्द ही घूमते रहे। सुहागरात पर जहाँ अनुराग उत्साहित था, वहीं अनन्या वीर की यादों में डूबी हुई सो गई। अब इसके आगे- अनन्या को गहरी नींद में सोता देखकर अनुराग ने सोचा, कितने चैन से सो रही है ... थक गई होगी, सोने देता हूँ, ऐसे में उठाना पूरा स्वार्थी लगने जैसा ही होगा। वह भी अनन्या के बाजू में लेट गया। वह ...और पढ़े

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बड़े दिल वाला - भाग - 6

अभी तक आपने पढ़ा कि अनुराग ने पहली रात अनन्या की थकान का सम्मान करते हुए उसे नहीं जगाया सुबह उसे प्यार से सुहाग का पूरा सामान उपहार में दिया। हीरे का मंगलसूत्र और चूड़ियाँ देखकर अनन्या भावुक हो गई, अनुराग के स्पर्श ने उसके दिल को गहराई से छू लिया। अब इसके आगे- अनुराग के स्पर्श को अपने शरीर पर महसूस करते हुए अनन्या सोचने लगी, ऊपर वाले तू यह कैसी अग्नि परीक्षा ले रहा है। अनुराग का दिया हुआ ये उपहार सुहाग की निशानी है और इस शृंगार को अपनाने के लिए उसका मन तैयार नहीं है। ...और पढ़े

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बड़े दिल वाला - भाग - 7

अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या मन ही मन वीर को चाहती रही और अनुराग के स्पर्श से असहज रही। लेकिन अनुराग धैर्य और प्रेम से उसका सम्मान करता रहा, जिससे अनन्या चाहकर भी उसे दोषी साबित नहीं कर सकी। अब इसके आगे- इसी तरह देखते ही देखते अनुराग और अनन्या की शादी के चार दिन बीत गए। पाँचवें दिन अनन्या अपने बेडरूम की खिड़की के पास खड़ी बाहर देख रही थी। तभी वीर उसे दूर खड़ा दिखाई दिया। उसे देखते ही अनन्या के दिल की धड़कनें बढ़ने लगीं। वह डर भी रही थी कि कहीं किसी को शक ...और पढ़े

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बड़े दिल वाला - भाग - 8

अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या शादी के बाद भी वीर के प्रेम में उलझी रही और अनुराग की खोजने की कोशिश करती रही। अंततः वह बहाना बनाकर अपने मायके जाने की बात कहकर सीधे वीर के घर पहुँची, जहाँ भावुक मिलन के बीच वह अचानक असहज होकर उससे अलग हो गई। अब इसके आगे- वीर को इतना उतावला होता देखकर अनन्या ने नाराज़ होते हुए कहा, "वीर, यह क्या ...? मैं कैसी हूँ ...? वहाँ मुझे कोई तकलीफ तो नहीं है? यह सब पूछने की तुमने ज़रूरत नहीं समझी और सीधे सेक्स करने के लिए उतावले हो गए।" ...और पढ़े

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बड़े दिल वाला - भाग - 9

अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या वीर से मिलने गई लेकिन उसके उतावलेपन से नाराज़ होकर उसे समझाया कि अभी केवल अनुराग की गलतियाँ ढूँढने और सही समय पर उससे अलग होने की योजना बना रही है। घर लौटकर उसने अपने माता-पिता को बताया कि ससुराल में वह खुश नहीं है, परंतु कारण स्पष्ट नहीं किया। इससे उसके पिता योगेश को संदेह हुआ कि कहीं अनुराग में कोई कमी या समस्या तो नहीं है। अब इसके आगे- रात को जब सब सो गए, तब वीर और अनन्या बहुत रात तक मैसेज पर एक दूसरे से जुड़े रहे, बातें करते ...और पढ़े

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बड़े दिल वाला - भाग - 10

अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या और वीर रात भर मोबाइल पर अपने मिलन के सपने बुनते रहे, लेकिन अनुराग अचानक उसके मायके पहुँच गया। उसने सास-ससुर के सामने प्यार से अनन्या को घर वापस बुलाया और हनीमून की बातें कीं। इससे अनन्या की सारी योजनाएँ बिगड़ गईं और उसके पिता योगेश को उसकी नीयत पर संदेह होने लगा। अब इसके आगे - अनुराग के बिना बताए इस तरह अचानक आ जाने से अनन्या के तन-बदन में सांप लोट रहे थे। वह आग बबूला हो रही थी पर कर तो कुछ भी नहीं सकती थी। तभी कड़क स्वर में ...और पढ़े

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बड़े दिल वाला - भाग - 11

अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या अपने पिता के दबाव और अनुराग की सहजता के कारण ससुराल लौट आती रास्ते में वह गुस्से में रहती है, लेकिन अनुराग उसे आश्वासन देता है कि वह उसकी इच्छा के बिना कोई कदम नहीं उठाएगा। घर पहुँचकर सब सामान्य दिखता है, परंतु अनुराग के मन में संदेह और सवाल उठने लगते हैं कि कहीं अनन्या की शादी उसकी मर्जी के खिलाफ तो नहीं हुई। अब इसके आगे - अनुराग के ऑफिस जाने के बाद घर में ख़ुद को अकेला पाकर अनन्या बहुत खुश हो गई। वह आजाद पंछी की तरह महसूस कर ...और पढ़े

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