हिंदी किताबें, कहानियाँ व् उपन्यास पढ़ें व् डाऊनलोड करें PDF

अनजान रीश्ता - 16
by Heena katariya
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पारुल सुबह उठती है तभी उसे किसी के हंसने की आवाज आती है तो वह अपने रूम का दरवाजा खोल के देखती है की सेम और उसके पापा किसी ...

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 2
by Neelam Kulshreshtha
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कावेरी को जयपुर अपने घर आये उन्नीस बीस दिन हो चुके हैं लेकिन ऐसा लगता है दिल व घर दोनों खंडहर बन गये हैं। । एक जानलेवा सूनेपन का ...

गलतफहमी
by Dr. Vandana Gupta
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        सर्दी की दोपहर सिया को हमेशा ही अनोखे अहसास कराती है, पहले सिर्फ गुदगुदाती थी, अब कभी कभी उदास कर देती है। आज सुबह से ...

बिन तेरे...! भाग 4 - लास्ट पार्ट
by Dipti Methe
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Continue.........."राजीव..! कहाँ थे तुम..? तुम्हें पता भी हैं कितनी परेशान थी मैं तुम्हारे लिए | कमसे कम एक कॉल तो कर देते | और तुम फोन क्यूँ नहीं उठा ...

माँ:एक गाथा - भाग - 1
by Ajay Amitabh Suman
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ये कविता संसार की सारी माताओं की चरणों में कवि की सादर भेंट है.  इस कविता में एक माँ के आत्मा की यात्रा स्वर्गलोक से ईह्लोक तक विभिन्न चरणों में ...

बरसात के दिन - 11 ( अंतिम भाग )
by Abhishek Hada
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आदित्य दिशा के पास गया। और उससे कहा - ‘‘दिशा। अच्छा हुआ जो तुमने आज मिलने के लिए बुला लिया।’’ ‘‘मुझे तुमसे मिलने में कोई इन्टरेस्ट नही है। वो ...

वसीयत
by Namita Gupta
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        रेखा घर के कामों में व्यस्त थी । तभी बाहर बड़ी तेजी से कोलाहल उठा । लगता आज फिर किसी के यहां कुछ झगड़ा हो ...

द टेल ऑफ़ किन्चुलका - पार्ट - 7
by VIKAS BHANTI
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"सर, एस आई कैन रिकॉल सॅटॅलाइट इमेजेज देयर वास अ लार्जर साइंस बट वी फाउंड अ मैन ओनली कवरिंग 30 फीट ऑफ़ एरिया । सो व्हाट वर अदर अबाउट!" ...

रिश्ता प्यार का
by Savita Mishra
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“घर में अकेले परेशान हो जाती हूँ | न आस न पड़ोस | न नाते रिश्तेदार |”“सुबह-शाम तो मैं रहता ही हूँ न !”“हुह ..सुबह जल्दी भागते हो और देर ...

मन्नू की वह एक रात - 12
by Pradeep Shrivastava
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मैं वास्तव में उसके कहने से पहले ही चुप हो जाने का निर्णय कर चुकी थी। क्यों कि मेरे दिमाग में यह बात थी कि इन्हें अभी ऑफ़िस जाना ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 2
by Mohd Arshad Khan
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जून की रात थी। हवा ठप थी। गर्मी से हाल-बेहाल हो रहा था। मौलाना रहमत अली दरवाजे़ खडे़ पसीना पोंछ रहे थे। ‘‘ओफ्रफोह! आज की रात तो बड़ी मुश्किल से ...

कमसिन - 15
by Seema Saxena
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पीका तुम भी बाग़ में जाती हो न ? हाँ, मैं और चाची घर के काम के निपटा जाते हैं और मम्मी तो बहुत जल्दी सुबह ही चली जाती हैं ...

पश्चाताप - 1
by Meena Pathak
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अमिता फूट फूट कर रो रही थी अब उसे अपने किये पर पश्चाताप हो रहा था शायद उसे उन बुजुर्गों की हाय लगी थी जिसे ...

औकात
by राज बोहरे
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कहानी- राजनारायण बोहरे                           औकात जिस दिन से दिनेश अहमदाबाद आये, मन का चैन छिन गया।      एक लम्बे अरसे से वह उससे दूर  रहे आये हैं और ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 6
by Rashmi Ravija
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(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

उदास क्यों हो निन्नी...? - 2
by प्रियंका गुप्ता
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आज सोचती हूँ, उस दिन अनुज दा मुझे समझाते तो शायद एक अनजान रास्ते पर यूँ बढ़ते मेरे कदम रुक गए होते, पर अनुज दा की ज़बान पर ताला ...

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 1
by Neelam Kulshreshtha
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``ऑनलाइन जर्नलिस्ट अवॉर्ड गोज़ टु प्रिशा पटेल फ़ॉर हर राइट अप `यूज़ ऑफ़ सेनेटरी नेपकिन्स एन्ड हाइजीन इन वीमन ऑफ़ विलेजेज़। ``शी मीडिया के पुरस्कार समारोह में घोषणा होती ...

आमची मुम्बई - 26
by Santosh Srivastav
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मुम्बई बड़े दिलवाली है, सुनहले सपनों की खान है सबको अपने मेंसमेट भी लेती है और सपनों को सच करने का रास्ता भी दिखाती है ...

मनचाहा (अंतिम भाग)
by V Dhruva
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रात को रवि भाई मुझे निशु के घर से ले जाने आए थे। मै जब नीचे अाई तब आंटी जी वहा नहीं थे। यह देखकर मुझे थोड़ा अच्छा लगा। ...

माँमस् मैरिज - प्यार की उमंग - 10
by Jitendra Shivhare
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मां का रौद्र रूप मैंने उस दिन पहली बार ही देखा था। रत्ना ने पलंग पर सोई हुई मां का गला दबाने की जैसे ही कोशीश की, मां ने ...

फिल्म रिव्यूः ‘ड्रीम गर्ल’ कमाल-धमाल-बेमिसाल कोमेडी
by Mayur Patel
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क्या कर रहा है? क्या कर रहा है? क्या कर रहा है ये लडका आयुष्मान खुराना..? दे धनाधन सिक्सर पे सिक्सर… सिक्सर पे सिक्सर… मारे जा रहा है. ‘विकी ...

अफसर का अभिनन्दन - 17
by Yashvant Kothari
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मारीशस में कवि                             यशवंत कोठारी जुगाडू कवि मारीशस पहुँच गए.हर सरकार में हलवा पूरी जीमने का उनका अधिकार है,वे हर सरकार में सत्ता के गलियारे में कूदते फांदते ...

शो शो
by Saadat Hasan Manto
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घर में बड़ी चहल पहल थी। तमाम कमरे लड़के लड़कियों, बच्चे बच्चियों और औरतों से भरे थे। और वो शोर बरपा हो रहा था। कि कान पड़ी आवाज़ सुनाई ...

मायामृग - 2
by Pranava Bharti
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सुधरना इतना आसान होता तो बात ही क्या है ? ” यह फुसफुसाहट उसके मन की भीतरी दीवारों पर सदा से टकराती रही है और वह सोचती रही है ...

दूसरी का चक्कर
by r k lal
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“दूसरी का चक्कर” आर 0 के 0 लाल           उनके घर के सामने बड़ी भीड़ लगी  हुई थी। सभी लोग इंतजार कर रहे थे कि चंदन की बॉडी ...

आसपास से गुजरते हुए - 2
by Jayanti Ranganathan
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रात के बारह बजने को थे। मैंने फुर्ती से अलमारी से वोद्का की बोतल निकाली और दोनों के लिए एक-एक पैग बना लिया, ‘नए साल का पहला जाम, मेरी ...

हिमाद्रि - 21
by Ashish Kumar Trivedi
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                    हिमाद्रि(21)अगले दिन उमेश फिर अपने बचे हुए सवालों के साथ डॉ. गांगुली के क्लीनिक पर मौजूद था। उसके कुछ ...

दस दरवाज़े - 18
by Subhash Neerav
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ऊषा के जाने के बाद घर जैसे खाली खाली सा हो गया हो। इतना खाली तो यह पहली पत्नी जगीरो के जाने के बाद भी नहीं हुआ था। ऊषा ...

अंजामे मुहब्बत - 4
by Angelgirlaaliya
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                अगली सुबह काफ़ी हलचल थी। शाहमीर  के अक्सर रिश्तेदार आ चुके थे।मर्दान खाना अलग होने के बावजूद रिश्तेदार लड़के ज़नान खाने ...

अदृश्य हमसफ़र - 30 - अंतिम भाग
by Vinay Panwar
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रास्ते भर भैया और ममता चुपचाप रहे। दोनो को कुछ सूझ ही नही रहा था कि बात करें भी तो क्या। बीच बीच में एक दूसरे की तरफ देखकर बस ...