जैन धर्म : एक व्यापक अध्ययनअध्याय–1 : जैन धर्म का परिचय एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमिभूमिकामानव सभ्यता के इतिहास में अनेक धार्मिक और दार्शनिक परंपराओं ने जन्म लिया। इन परंपराओं का उद्देश्य केवल ईश्वर की उपासना का मार्ग बताना नहीं था, बल्कि मनुष्य को ऐसा जीवन जीना सिखाना भी था जिससे वह स्वयं, समाज और समस्त जीव-जगत के प्रति उत्तरदायी बन सके। भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं में जैन धर्म का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। यह धर्म अहिंसा, सत्य, आत्मसंयम, करुणा और आत्मशुद्धि पर आधारित जीवन-दर्शन प्रस्तुत करता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मनुष्य को अपने कर्मों के
जैन धर्म एक व्यापक अध्ययन
जैन धर्म : एक व्यापक अध्ययनअध्याय–1 : जैन धर्म का परिचय एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमिभूमिकामानव सभ्यता के इतिहास में अनेक और दार्शनिक परंपराओं ने जन्म लिया। इन परंपराओं का उद्देश्य केवल ईश्वर की उपासना का मार्ग बताना नहीं था, बल्कि मनुष्य को ऐसा जीवन जीना सिखाना भी था जिससे वह स्वयं, समाज और समस्त जीव-जगत के प्रति उत्तरदायी बन सके। भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं में जैन धर्म का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। यह धर्म अहिंसा, सत्य, आत्मसंयम, करुणा और आत्मशुद्धि पर आधारित जीवन-दर्शन प्रस्तुत करता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मनुष्य को अपने कर्मों के ...और पढ़े
जैनधर्म एक व्यापक अध्ययन अध्याय 2
में अहिंसा को सर्वोच्च धर्म माना गया है।2. सत्यसत्य का अर्थ है यथार्थ बोलना और असत्य से बचना। जैन में सत्य को केवल वाणी की शुद्धता नहीं, बल्कि विचारों की पारदर्शिता भी माना गया है।3. अस्तेयअस्तेय का अर्थ है चोरी न करना। किसी भी वस्तु को बिना अनुमति ग्रहण न करना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना इस व्रत का मूल भाव है।4. ब्रह्मचर्यब्रह्मचर्य का अर्थ है इंद्रियों पर संयम। यह केवल शारीरिक संयम नहीं, बल्कि मन की शुद्धता और वासनाओं पर नियंत्रण भी है।5. अपरिग्रहअपरिग्रह का अर्थ है आवश्यकता से अधिक संग्रह न करना। जैन धर्म सिखाता ...और पढ़े