जीठा का नौजवानएक सच्ची घटना से प्रेरित काल्पनिक उपन्यासरात के साढ़े ग्यारह बजे थे।लाहौर की सड़कों पर धीरे-धीरे सन्नाटा उतर रहा था। दिनभर शोर से भरे रहने वाले बाज़ारों की दुकानें बंद हो चुकी थीं। कहीं-कहीं चायखानों पर बैठे लोग आख़िरी प्याली के साथ दिनभर की खबरों पर चर्चा कर रहे थे।शहर से कुछ दूर एक आलीशान कोठी की ऊपरी मंज़िल पर रोशनी जल रही थी।
पहचान मजीठा का नौजवान - अध्याय 1
### पहचान### सीज़न 1 — अध्याय 1### मजीठा का नौजवानएक सच्ची घटना से प्रेरित काल्पनिक उपन्यासरात के साढ़े ग्यारह थे।लाहौर की सड़कों पर धीरे-धीरे सन्नाटा उतर रहा था। दिनभर शोर से भरे रहने वाले बाज़ारों की दुकानें बंद हो चुकी थीं। कहीं-कहीं चायखानों पर बैठे लोग आख़िरी प्याली के साथ दिनभर की खबरों पर चर्चा कर रहे थे।शहर से कुछ दूर एक आलीशान कोठी की ऊपरी मंज़िल पर रोशनी जल रही थी।कमरे में बैठा पच्चीस वर्षीय कुलवंत सिंह अपने हाथ में शराब का गिलास लिए खिड़की से बाहर देख रहा था।छह फुट लंबा कद, चौड़े कंधे, कसरती शरीर और ...और पढ़े
पहचान मजीठा का नौजवान - अध्याय 2
### पहचान### सीज़न 1 — अध्याय 2### रावलपिंडी से पलायनरावलपिंडी की उस सुबह में कुछ भी असामान्य नहीं था। रोज़ की तरह निकला था। गलियों में दूध बेचने वालों की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। दुकानदार अपनी दुकानें खोलने की तैयारी कर रहे थे और घरों में औरतें दिन के काम में जुटी थीं।सरदार जोगिंदर सिंह का परिवार भी इसी सामान्य दिन की शुरुआत कर रहा था।पंद्रह वर्षीय जोगिंदर अपने पिता के साथ बैठा नाश्ता कर रहा था। उसकी माँ रोटियाँ परोस रही थीं। घर के दूसरे सदस्य भी वहीं बैठे थे। बातचीत का विषय परिवार के रोज़मर्रा के ...और पढ़े
पहचान मजीठा का नौजवान - अध्याय 3
### पहचान### सीज़न 1 — अध्याय 3### अपने ही घर से बेदखलअमृतसर के शरणार्थी शिविर में सुबह का उजाला चुका था। तंबुओं के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी थीं। कोई भोजन लेने के लिए खड़ा था, कोई पानी के लिए और कोई अपने बीमार परिजन के लिए दवा का इंतज़ाम करने की कोशिश कर रहा था।यहाँ हर परिवार की अपनी त्रासदी थी। किसी ने अपना घर खोया था, किसी ने कारोबार, तो किसी ने अपने प्रियजनों को। लेकिन इन सभी के बीच एक समानता थी—हर कोई किसी तरह दोबारा जीवन शुरू करना चाहता था।सरदार जोगिंदर सिंह का परिवार ...और पढ़े
पहचान मजीठा का नौजवान - अध्याय 4
### पहचान### सीज़न 1 — अध्याय 4### सरहद के उस पारसन् 1947 का वह दौर था, जब पंजाब की पर खिंची सरहद केवल दो देशों को अलग नहीं कर रही थी, बल्कि लाखों लोगों के रिश्तों, विश्वासों और भविष्य को भी बाँट रही थी।कहीं लोग अपना घर छोड़कर जा रहे थे, तो कहीं वर्षों से बसे परिवार अचानक अपने ही शहर में असुरक्षित महसूस करने लगे थे। किसी को अपनी जान बचाने की चिंता थी, तो किसी को अपने बच्चों की।इसी उथल-पुथल के बीच सरदार दर्शन सिंह अपने परिवार के साथ सीमा पार करने की तैयारी कर रहा था।दर्शन, ...और पढ़े
पहचान मजीठा का नौजवान - अध्याय 5
### पहचान### सीज़न 1 — अध्याय 5### एक सैनिक का संकल्पअमृतसर के शरणार्थी शिविर में बिताए गए दिन सरदार सिंह के जीवन की सबसे कठिन यादों में शामिल थे। पंद्रह वर्ष की उम्र में उसने वह सब देख लिया था, जिसे देखने के लिए किसी भी बच्चे को मजबूर नहीं होना चाहिए। अपना घर छूट गया था, परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी और जिन रिश्तों पर सबसे अधिक भरोसा था, उन्हीं में से एक ने निराश कर दिया था।स लेकिन जोगिंदर ने अपनी परिस्थितियों को अपनी नियति मानने से इनकार कर दिया था।वह अक्सर अपने पिता की ...और पढ़े