आंध्र की उस तपती जमीन के नीचे, गोलकुंडा की खदानों में सन्नाटा सिर्फ फावड़ों की आवाज से टूटता था हजारों मजदूर पसीने से तर-बतर, जमीन के सीने को चीरकर कुछ ढूंढने की नाकाम कोशिश कर रहे थे इन्हीं में से एक था 'रामा', जिसकी पुश्तें इसी मिट्टी को खोदते-खोदते इसी मिट्टी में मिल गई थीं उस दिन हवा में एक अजीब सी भारीपन थी, जैसे कुदरत कोई बहुत बड़ा राज खोलने वाली होरामा का फावड़ा एक ऐसी कठोर सतह से टकराया जिसकी आवाज पत्थर जैसी बिलकुल नहीं थी |
कोहिनूर: रोशनी के पहाड़ की अदृश्य सिसकियाँ और सदियों का प्रतिशोध - 1
आंध्र की उस तपती जमीन के नीचे, गोलकुंडा की खदानों में सन्नाटा सिर्फ फावड़ों की आवाज से टूटता था मजदूर पसीने से तर-बतर, जमीन के सीने को चीरकर कुछ ढूंढने की नाकाम कोशिश कर रहे थे इन्हीं में से एक था 'रामा', जिसकी पुश्तें इसी मिट्टी को खोदते-खोदते इसी मिट्टी में मिल गई थीं उस दिन हवा में एक अजीब सी भारीपन थी, जैसे कुदरत कोई बहुत बड़ा राज खोलने वाली होरामा का फावड़ा एक ऐसी कठोर सतह से टकराया जिसकी आवाज पत्थर जैसी बिलकुल नहीं थी उसने झुककर अपने कांपते हाथों से कीचड़ और मलबे की परतों को ...और पढ़े
कोहिनूर: रोशनी के पहाड़ की अदृश्य सिसकियाँ और सदियों का प्रतिशोध - 2-3
समरकंद की सर्द रातेंतैमूर लंग जब दिल्ली को राख के ढेर में बदलकर समरकंद लौटा, तो उसकी झोली में का वह सूरज था समरकंद की नीली गुंबदों वाले महलों में जब कोहिनूर को निकाला गया, तो वहां की ठंडक जैसे जम गई तैमूर ने इसे अपनी तलवार की मूठ पर सजाया, ताकि युद्ध के मैदान में इसकी चमक दुश्मनों को अंधा कर सके पर तैमूर के जाते ही उसके बेटों और पोतों में उस पत्थर को लेकर एक ऐसी जंग छिड़ी जो दशकों तक चलीमिर्जाओं के बीच होने वाले हर कत्ल के पीछे कहीं न कहीं उस पत्थर की ...और पढ़े